सियासत ने गुड़गांव के एक हिस्से की आबादी की दुखती रग को पहचान लिया है। राजनैतिक दल चुनाव जीतने के बाद नासूर बने इस मर्ज की दवा करने का दावा कर रहे हैं। साथ ही इसे चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की भी तैयारी है।
शहर में आयुध डिपो का 900 मीटर दायरा वह नासूर है, जिसने लगभग दो लाख से अधिक की आबादी को मूलभूत सुविधाओं से वंचित कर रखा है। कई वर्षों से यहां के लोग इसके खिलाफ संघर्ष भी कर रहे हैं।
पिछले चार सालों में इस संघर्ष को गति मिली। सभी राजनैतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से इसका विरोध कर जनसुविधाओं की मांग कर चुकी हैं। इसके बाद अस्थाई तौर पर बिजली-पानी की व्यवस्था का अदालती आदेश हुआ है।
अब यह मुद्दा चुनावी सभाओं में तैरने लगा है। भाजपा, इनेलो और ‘आप’ इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी इसी के सहारे चुनाव में मैदान में उतरे हैं।