फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निठारी कांड: कोली पूछता रहा-फैसला क्या रहा

Thu, 29 Jan 2015 09:39 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
फांसी की सजा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील करने की खबर जैसे ही निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को मिली, वह बैरक में उछल पड़ा।
विज्ञापन


इससे पहले डासना जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद सुरेंद्र कोली फैसले को लेकर बुधवार सुबह से ही बेचैन था। बार-बार बंदीरक्षकों से वह हाईकोर्ट के फैसले के बारे में पूछ रहा था।

सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा उम्र कैद में बदलने केमामले में डासना जेल अधीक्षक एसपी यादव ने बताया कि फैसले की जानकारी कोली को अपने कक्ष में बुलाकर दी।
विज्ञापन


इससे पहले ही कुछ बंदीरक्षकों से उसे जानकारी मिल गई थी। कोली का कहना था कि उसे पहले से ही विश्वास था कि उसे फांसी नहीं लगेगी। दिन भर बैरक में बेचैनी से चक्कर लगाने वाले कोली ने इससे पहले कई बार गीता का पाठ किया।

कोली से मिलने मीडिया के लोग जेल पहुंचे, मगर उसने जेल प्रशासन से गुजारिश की है कि उसे फिलहाल दूर रखें। दिन भर कोली ने खाना नहीं खाया था। फैसला आने के बाद उसने शाम को भरपेट खाना खाया। निठारी के 11 मामलों को सुनवाई चल रही है।

भगवान को धन्यवाद दे रही कोली की मां
निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदलने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय से कोली की मां कुंती देवी बहुत गदगद है। बोली, उसे भगवान पर पूरा भरोसा था।

इसी कारण आठ साल बाद भी मेरे बेटे को फांसी नहीं हो सकी। मेरा बेटा निर्दोष है। असली दोषी पंधेर है। उसे कभी न कभी जरूर फांसी की सजा मिलेगी।

सुरेंद्र कोली की मां कुंती देवी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह ने दी।

जैसे ही मां को बेटे की फांसी की सजा आजीवन कारावास में तब्दील होने की सूचना मिली वह बार-बार भगवान को धन्यवाद देने लगी। कोली की मां बोली उसे पूरा भरोसा है कि उसका बेटा एक न एक दिन जेल से छूट कर आएगा।

विशेष न्यायाधीश एस लाल ने कोली को बताया था समाज के लिए खतरा
सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने 24 दिसंबर 2012 को निठारी कांड के पांचवे मामले में सुरेंद्र कोली को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।

अपने इस आदेश के साथ ही विशेष न्यायाधीश ने कोली को लेकर टिप्पणी भी की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि ‘अभियुक्त के मन में हमेशा यही भावना बनी रहती है कि किसको मारूं, काटूं व खांऊ। अभियुक्त इन परिस्थितियों में समाज के लिए खतरा बन चुका है।

उसके सुधार और पुर्नवास की संभावनाएं भी नहीं हैं। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिल सकती है, जब अभियुक्त को मृत्यु दंड से ही दंडित किया जाए। अभियुक्त को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।’

राज रह गए तीन मामले
एक ओर निठारी कांड के मामलों में कोर्ट आरोपियों को सजा सुना रही है। वहीं तीन मामले ऐसे भी हैं, जिनमें सीबीआई भी कुछ नहीं ढूंढ पाई।

जांच के बाद सीबीआई ने इन तीनों ही मामलों में अपनी फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। इसके साथ ही शेखराजा, कुमारी सोनी और एक अज्ञात मामला हमेशा के लिए ही राज बन गए।

जब तक नहीं होगी फांसी, तब तक लड़ेंगे
निठारी कांड के नरपिशाच सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा उम्रकैद में बदले जाने पर पीड़ित परिजनों को निराशा हुई है। वे चाहते हैं कि दोषियों को फांसी से कम सजा नहीं मिलनी चाहिए। मासूम बच्चों की हत्या की गई है।

उन्होंने कहा कि मोनिंदर सिंह पंधेर को भी फांसी होनी चाहिए। परिजनों का कहना है कि जब तक दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती तब तक वे लड़ते रहेंगे।

कोर्ट की कार्यवाही
हाईकोर्ट ने 31 अक्तूबर 2014 को अंतरिम आदेश पारित कर कोली की फांसी की सजा पर याचिकाओं के निस्तारण तक रोक लगा दी थी। कोली को 14 वर्षीय रिंपा हलदर हत्या मामले में फांसी मिली थी।

इस मामले में कोली को 21 दिसंबर 2006 को जेल भेजा गया था। सीबीआई ने जांच की तथा कोली व अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। 13 फरवरी 2009 को एडिशनल सत्र न्यायाधीश गाजियाबाद ने कोली को फांसी की सजा सुनाई।
विज्ञापन


11 सितंबर 2001 को हाईकोर्ट तथा बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा। राज्यपाल ने 2 अप्रैल 2013 को तथा राष्ट्रपति ने 20 जुलाई 2014 को कोली की दया याचिका को खारिज कर दिया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें