दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है। इनकी पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को खारिज कर दिया। आइए, एक नजर डालते हैं कि आखिर 16 दिसंबर की रात को क्या हुआ, कैसे यह केस आगे बढ़ा और कैसे मिला पीड़िता को न्याय।
दिसंबर-16
23 वर्षीय पैरामैडिकल की छात्रा एक चलती बस में गैंगरेप का शिकार हुई तथा उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा गया। बाद में दोनों को बस से बाहर फेंक दिया गया।
दिसंबर-17
दिल्ली पुलिस को सीसीटीवी फुटेज के जरिए बस का सुराग मिला। घटना के बाद बस को आरकेपुरम के रविदास कैंप के नजदीक खड़ा किया गया था। बस के ड्राइवर रामसिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और इसे गिरफ्तार कर लिया गया।
दिसंबर-18
तीन अन्य अपराधी विनय और पवन उर्फ कालू को हिरासत में लिया गया। मुकेश को राजस्थान के करौली गांव से गिरफ्तार किया गया था। जिसके तीन दिन बाद एक अन्य आरोपी अक्षय को भी गिरफ्तार किया गया था।
दिसंबर-21
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पवन कुमार द्वारा पीड़िता का बयान रिकॉर्ड किया गया।
दिसंबर-26
डॉक्टरों को पीड़िता की आंतों को उसके शरीर से हटाना पड़ा क्योंकि रेप के बाद उसके गुप्तांग में लोहे की छड़ डालने की वजह से वह क्षतिग्रस्त हो गईं थीं।
दिसंबर-27
दिल्ली में इलाज का असर न होने पर निर्भया को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर के एलिजाबेथ हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया।
दिसंबर-29
पीड़िता जिंदगी से जंग हार गई।
वर्ष 2013 की शुरुआत हो चुकी थी लेकिन निर्भया कांड देश के नागरिकों में रोष था। वहीं पुलिस इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का हरसंभव प्रयास कर रही थी। उधर निर्भया ने आखिरी सांस ली, इधर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई।
जनवरी 3-5
पुलिस ने हत्या, हत्या की कोशिश, अपहरण, अप्राकृतिक यौन संबंध, गैंगरेप तथा लूट के मामले में पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की तथा अदालत ने इस चार्जशीट को संज्ञान में लिया।
जनवरी-17
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांचों आरोपियों के खिलाफ गंभीरता से जांच की प्रक्रिया शुरू की।
जनवरी-28
जुविनाइल जस्टिस बोर्ड ने पांचों आरोपियों में से एक के नाबालिग होने की घोषणा की।
मार्च-11
बस ड्राइवर तथा मुख्य आरोपी राम सिंह तिहाड़ जेल में मृत पाया गया।
अगस्त-31
जुविनाइल ने नाबिलग को रेप और मर्डर को दोषी मानते हए तीन साल के लिए सुधार गृह भेजा।
सितंबर-10
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चारों आरोपियों को सभी 13 अपराधों के लिए दोषी करार दिया।
सितंबर-13
कोर्ट ने चारों आरोपियों को फांसी की सजा का एलान किया।
वर्ष 2014
मार्च-13
दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने का समर्थन किया।
जुलाई-14
सुप्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियों के फांसी की सजा पर अग्रिम कार्रवाई तक रोक लगा दी।
वर्ष 2015
दिसंबर-14
केंद्र ने हाई कोर्ट से किशोर अपराध न्यायालय से नाबालिग की सुधारगृह में तीन साल की अवधि को बढ़ाने के लिए कहा।
वर्ष 2016
जनवरी 22
सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों द्वारा अग्रिम सुनवाई के लिए दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया।
अप्रैल 4
सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों द्वारा फांसी की सजा के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई शुरू की।
अप्रैल 8
सुप्रीम कोर्ट ने दो वरिष्ठ वकीलों ने दोषियों के बचाव के लिए पूछा।
जुलाई12
चारों दोषियों में से दो ने देश के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर तथा जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखा कि उन्हें बचाव के लिए स्वीकृति नहीं दी गई।
जुलाई 18
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की दलील को ठुकरा दिया।
दिसंबर 3
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा उसके मुवक्किल को इस मामले में गलत आधार पर दोषी बनाया गया है क्योंकि पुलिस यह साबित करने में फेल हो गई कि दोषियों के बीच पहले से ही कोई सड्यंत्र रचा गया था।
वर्ष 2017
मार्च 6
तिहाड़ जेल सुप्रिन्टेंडेंट से सुप्रीम कोर्ट ने चारों आरोपियों के आचार व्यवहार की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।
मार्च 27
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाले मामले में चार अभियुक्तों द्वारा अपील किए जाने वाली याचिका पर उनकी मौत की सजा को कायम रखते हुए अपने फैसले को सुरक्षित रखा।
अप्रैल 5
सुप्रीम कोर्ट ने चार मुजरिमों को फांसी की सजा के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
नवंबर दिसंबर
तीन दोषियों ने समीक्षा याचिका दाखिल की।
वर्ष 2018
जुलाई 9
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की समीक्षा याचिका को ठुकरा दिया।