अब्दुल करीम टुंडा, डेविड हेडली के साथी तहव्वुर राणा जैसे मोस्टवांडेट आतंकियों से रिश्ते, सेटेलाइट फोन की दो बार लोकेशन मिलने के लिए बदनाम रहे हापुड़ जिले का एक बार फिर आतंकी कनेक्शन सामने आने से हड़कंप है। एनआईए और एटीएस की टीमों द्वारा बुधवार को जिले में की गई कार्रवाई ने पुरानी कड़वी यादों को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
पिलखुवा के मोहल्ला अशोक नगर के लोगों को 19 जनवरी 1994 की वह सर्द रात आज भी याद है, जब रात के सन्नाटे को चीरती हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ियां मोहल्ले में पहुंची थीं। बाद में पता चला कि यह टीम लश्कर ए तैयबा के आतंकी अब्दुल करीब टुंडा की तलाश में आयी थी, जो यहां का निवासी था।
मामूली मारपीट और तमंचा रखने के आरोप में 1968 में पिलखुवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद टुंडा अचानक गायब हो गया था। इतने साल बाद उसके इस रूप में सामने आने से पूरा जिला सकते में आ गया था। यह पहला मामला था जब किसी आतंकी का जिले से रिश्ता सामने आया था।
इसके बाद हापुड़ में इस प्रकार की गतिविधियां सामने आती गईं। 28 नवंबर 2011 की शाम 7.28 बजे पाकिस्तान के बार्डर पर सेना के आईटी विशेषज्ञों ने एक सेटेलाइट फोन को ट्रेस किया था।