आयोग ने इसे पुलिस की क्रूरता बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई है। मालूम हो कि सेक्टर-46 के घर में चोरी के आरोप में थाना सेक्टर-39 पुलिस पर किशोरी को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगा था।
किशोरी की मां इस घर में काम करती है। उसकी तबियत खराब होने पर किशोरी एक सप्ताह से घर में काम कर रही थी। इसी दौरान मकान मालकिन ने उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की थी।
दिल्ली की एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन ने मामले में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी से शिकायत की थी। नोटिस में मेडिकल जांच में किशोरी को जलाने और चोट लगने की पुष्टि होने की भी बात कही गई है।
थाना सेक्टर-39 प्रभारी निरीक्षक ने किशोरी को अवैध हिरासत में रखने और प्रताड़ित करने के आरोपों से इंकार किया था। उनका कहना है कि चोरी के मामले में पूछताछ के लिए किशोरी को बुलाया गया था। पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया गया था।