राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सामने रिंग रोड पर गेट नंबर 6 के पास स्थित गार्बेज डंप (ढलाव) को बंद करने का निर्देश जारी किया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल ने साउथ एक्सटेंशन निवासी सुदेश प्रकाश सब्बरवाल की तरफ से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया।
अदालत ने पाया कि एम्स से मात्र 70 मीटर दूर स्थित यह ढलाव चिकित्सा और व्यावसायिक कचरे से प्रदूषण फैला रहा है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी कचरा प्रबंधन में अनियमितताओं की पुष्टि की और इसे बंद करने की सिफारिश की थी। एनजीटी ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को छह महीने के भीतर इस ढलाव को पूरी तरह बंद करने और कचरा संग्रहण व परिवहन के लिए वैकल्पिक स्थान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जो जनता के लिए असुविधाजनक न हो। तब तक एमसीडी को सीपीसीबी के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के क्लॉज 5.6 का पालन करना होगा, जिसमें कचरे का आवरण, दुर्गंध नियंत्रण, लीचेट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा और हरियाली जैसे उपाय शामिल हैं। डीपीसीसी को इस ढालों की नियमित निगरानी करने और नियमों के उल्लंघन पर त्वरित सुधारात्मक व दंडात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
एनजीटी ने जारी किया था नोटिस
इससे पहले एनजीटी ने एम्स के पास कचरा फेंके जाने का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर केंद्र और एमसीडी को नोटिस जारी किया था। एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दावा किया गया कि एम्स के गेट नंबर छह के सामने करीब 30 मीटर के क्षेत्र में कचरा फेंका जा रहा है। तब पीठ ने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता की शिकायत यह है कि फेंका जा रहा कचरा एम्स के आसपास वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है और इस तरह खुले में कचरा डालने से आसपास के क्षेत्र में भारी वायु प्रदूषण हो रहा है।