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एनजीटी का बड़ा फैसला, शादी-पार्टी आयोजनों से होने वाले प्रदूषण पर लगेगी रोक

Wed, 14 Nov 2018 03:34 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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delhi pollution - फोटो : ani
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राष्ट्रीय राजधानी के होटल, बारात घरों और फॉर्म हाउस में होने वाली शादी व पार्टी के आयोजनों से अक्सर शोरगुल,  ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण की समस्या पैदा होती है। इसे नियंत्रित करने और पर्यावरणीय क्षति  रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने एक संयुक्त समिति गठित की है। 
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समिति को ऐसी गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। साथ ही पर्यावरण की क्षति होने पर उसे रोकना भी होगा। पीठ ने समिति को बैठक कर एक महीने के भीतर कार्ययोजना तैयार करने व दिल्ली के मुख्य सचिव को समिति को सभी सुविधाएं मुहैया कराने को कहा है।  

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने वेस्टेंड ग्रीन फॉर्म सोसाइटी की याचिका पर यह आदेश दिया। सोसाइटी का आरोप है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के निकट  महिपालपुर और रजोकरी में बारात घर व होटल नियमों और मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं।
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इनकी वजह से सड़क पर ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण की समस्या खड़ी हो रही है।  पीठ ने दिल्ली विकास प्राधिकरण को आदेश दिया है कि होटल व बैंक्वेट हॉल में ऐसे ट्यूबवेल जो बिना अनुमति स्विमिंग पुल के लिए लगाए गए हैं, उन्हें तत्काल सील किया जाना चाहिए। 

जस्टिस एसपी गर्ग करेंगे कामकाज की निगरानी

इस संयुक्त जांच समिति के कामकाज की निगरानी  दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस एसपी गर्ग करेंगे। वहीं समिति में नगर निगम के प्रतिनिधि, केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली पुलिस, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य शामिल होंगे। 

इस समिति को महीने में दो बार बैठक करनी होगी। इसकी अध्यक्षता दिल्ली शहरी विभाग के सचिव को करनी होगी। पहली बैठक में सीवेज लाइन बिछाने, भू-जल दोहन रोकने, वर्षा जल संचयन, ठोस कचरा प्रबंधन, भू-जल रीचार्ज करने आदि गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया गया है।  
 
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एनजीटी ने ये भी दिए निर्देश

पीठ ने कहा कि ट्रैफिक जाम के कारण होने वाले वायु प्रदूषण और डीजे सेट के कारण होने वाले ध्वनि प्रदूषण को भी जांचा जाना चाहिए। समिति को इन प्रदूषण के आंकड़ों को एक जगह एकत्रित कर प्रकाशित भी करना चाहिए। इसके अलावा डीजे सेट, लाउडस्पीकर, पटाखों इत्यादि के कारण होने वाले प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कार्रवाई भी करनी चाहिए। यदि कोई अवैध संरचना मौजूद है तो उसे हटाने के लिए भी समिति निर्णय ले सकती है।  
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