नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी ने दोनों से यमुना सफाई के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उन्होंने अब तक वह रिपोर्ट नहीं दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय और दिल्ली सरकार के वकीलों के पेशी पर नहीं पहुंचने और रिपोर्ट नहीं देने पर यह फैसला सुनाया।
पीठ ने कहा कि 8 अगस्त, 2017 का उसका फैसला बाध्यकारी था, लेकिन न तो दोनों के कोई प्रतिनिधि ही पेशी पर उपस्थित हुए और न ही स्टेटस रिपोर्ट दी, लिहाजा दोनों को 50-50 हजार रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।
एनजीटी ने इससे पहले हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तीन हफ्ते में यमुना की सफाई पर अपनी-अपनी रिपोर्ट देने को कहा था। पीठ ने कहा कि विषैले औद्योगिक कचरे और सीवेज के कारण यमुना का प्रदूषण गंभीर चिंता का कारण है।
एनजीटी ने हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यह भी निर्देश दिया कि वह यमुना के पानी की गुणवत्ता और बहाव का अध्ययन करे। साथ ही हरियाणा में इसके प्रवेश से लेकर इसके किनारों पर स्थित उद्योगों की सूची भी सौंपे।
एनजीटी ने यमुना की सफाई की निगरानी के लिए दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया है, जिसे नियमित अंतराल पर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।