नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा कि यदि वायु प्रदूषण नियंत्रण योजना (ग्रैप) का उल्लंघन होता है, तो आवेदक को केंद्र के वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से संपर्क करना चाहिए।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने 19 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा था कि वर्तमान में निर्माण और तोड़फोड़ पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। पीठ जिसमें न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे कहा, यदि ग्रैप लागू होने के बाद भी उल्लंघन हो रहा है तो आवेदक सीएक्यूएम के समक्ष शिकायत दर्ज करने के लिए स्वतंत्र है।
ट्रिब्यूनल ने यह फैसला उस याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसमें दावा किया गया था कि जब ग्रैप 3 प्रतिबंध लगाए गए थे, तब दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों शामिल था।
बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण से निपटने के लिए रणनीति तैयार करने के लिए जिम्मेदार वैधानिक निकाय सीएक्यूएम ने 14 जनवरी को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) स्टेज-3 लागू किया था। चार दिन बाद, हवा की गुणवत्ता में सुधार के बाद दिल्ली-एनसीआर में गैर-जरूरी निर्माण कार्य और बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध हटा दिया गया था।