फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवैध बूचड़खानों के संचालन पर एनजीटी ने लगाई रोक

Thu, 09 Jun 2016 01:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल  (एनजीटी)  ने  उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में मौजूद तीन बूचड़खानों के संचालन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। बेंच ने संबंधित प्राधिकरणों से कहा है कि वह तत्काल ईगल कॉन्टिनेंटल फूड प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स अल-नफीस फ्रोजेन फूड्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स जेवा एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के संचालन पर रोक लगाएं।
विज्ञापन


याची का आरोप था कि इन अवैध बूचड़खानों के जरिये पर्यावरण को क्षति पहुंचाई जा रही है। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी। जस्टिस राघवेंद्र एस राठौर की अध्यक्षता वाली वैकेशन बेंच ने बुधवार को शैलेश सिंह की याचिका पर सुनवाई की।

बेंच ने इस मामले में पक्षकार बनाए गए प्राधिकरणों में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, पशु विभाग के प्रधान सचिव, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण, गाजियाबाद के जिलाधिकारी और पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

याची ने पेश किया स्थानीय प्रशासन का पत्र

सुनवाई के दौरान याची की ओर से वह पत्र भी पेश किया गया जिसमें स्थानीय प्रशासन की ओर से इन बूचड़खानों को बंद करने की बात कही गई थी। इन बूचड़खानों को बंद करने के लिए 24 जून 2014 को गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने उत्तर प्रदेश पशु विभाग के प्रधान सचिव को एक पत्र भी लिखा था।

इस पत्र में इन बूचड़खानों के अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) व लाइसेंस रद करने की अपील भी की गई थी। वहीं यह पत्र उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी दिया गया था। इसके बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। लिहाजा बेंच ने सभी प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर कहा है कि वे इन बूचड़खानों के संचालन पर रोक लगाएं।

याची ने आरोप लगाया है कि इन बूचड़खानों के जरिए बड़े पैमाने पर  बिना अनुमति भू-जल का दोहन किया जा रहा है। इसके अलावा इन बूचड़खानों से निकलने वाले अपशिष्ट का शोधन भी नहीं होता। यह नालियों के जरिए बहकर गंगा और यमुना की सहायक नदियों को भी प्रदूषित कर रहे हैं। वहीं इन बूचड़खानों में दूध देने वाली प्रजातियों का इस्तेमाल भी मांस के लिए किया जा रहा है। अब बेंच इस मामले पर अगली सुनवाई प्राधिकरणों के जवाब के बाद करेगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें