अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने से प्रसव होने की तीन माह में तीसरी घटना है। इससे पहले फरवरी माह में एक गर्भवती महिला के पास आधार न होने के कारण उसे समय पर इलाज नहीं दिया गया था।
जिसके चलते उसने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म देे दिया था और नवजात की मौत हो गई थी। वहीं बीती 19 अप्रैल को भी एक महिला का समय पर इलाज न मिलने पर अस्पताल के ही बाथरूम में भ्रूण गिर गया था और अब यह तीसरी घटना सामने आई है।
'यह मामला हैंड प्रोलैप्स का था। इस तरह के केस में बच्चे का हाथ बाहर आ जाता है। ऐसे मामलों में बच्चे को डिस्ट्रॉय करके ही निकाला जाता है। इस स्थिति में मरीज को रेफर करना मजबूरी है। डॉक्टर ने जांच के बाद ही महिला को रेफर किया था।' -डॉ. प्रदीप शर्मा, अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी