इतिहास खुद को दोहराता है। मंगलवार की आधी रात बारह बजते ही एक अद्भुत संयोग होगा। सत्तर साल पहले देश के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज 1947 का आईना बना कैलेंडर (पंचांग) 2014 में इतिहास दोहराएगा।
तिथियां, दिन, घड़ी, ग्रह, नक्षत्र हू-ब-हू वर्ष 1947 जैसे होंगे। ज्योतिष के जानकार इस संयोग को बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
वर्ष 1947 के कैलेंडर और वर्ष 2014 के कैलेंडर में जरा भी फर्क नहीं है। न तारीख में अंतर, न दिन में। ग्रह व नक्षत्रों की स्थिति भी एक जैसी। उत्सुकता इस बात को लेकर ज्यादा है कि वर्ष 1947 ब्रिटिश हुकूमत को देश से बाहर करने में गवाह बना था।
पराधीन भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन अंग्रेजों से आजादी मिली थी। ऐसे में दिन, तारीख, ग्रह व नक्षत्र दोहराने जा रहे नये वर्ष को लेकर ज्योतिष के जानकार भविष्यवाणी कर रहे हैं।
आचार्य गोपाल बिहारी मिश्र कहते हैं कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी साल का कैलेंडर, किसी अन्य साल में हूबहू मिल जाए। एक जैसे कैलेंडर के चलते आने वाले नए साल में देश में बड़े बदलाव हो सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. विद्याधर त्रिपाठी कहते हैं कि 70 साल पहले देश आजाद हुआ था। ऐसा ही आभास नूतन वर्ष के दिन, तारीख, ग्रह व नक्षत्र कराने जा रहे हैं। ऐसे में राजपाट परिवर्तन के योग हैं।