अब तिहाड़ में कोई वीआईपी जेल नहीं होगी और न ही जेल अधिकारी अपनी इच्छानुसार कैदियों की जेल संख्या तय कर पाएंगे। अब कैदी के नाम के पहले अक्षर के अनुसार कैदियों की जेल संख्या तय कर दी गई है।
अभी तक आमतौर पर नई दिल्ली जिले से आने वाले कैदियों को वीआईपी माना जाता था और उन्हें जेल संख्या चार में रखने की व्यवस्था थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
तिहाड़ प्रशासन के अंदर ही रोहिणी जेल भी आती है, सबसे ज्यादा परिवर्तन इसी जेल में होना है। 25 दिसंबर से कैदी एक से दूसरी जेल में शिफ्ट किए जाएंगे।
वे कैदी जिनका खून का रिश्ता है और किसी आरोप में जेल में बंद हैं उन्हें एक साथ रखने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा वे कैदी जिन्हें अत्यधिक अथवा विशेष सुरक्षा की जरूरत है उनके लिए तिहाड़-प्रशासन ही जेल संख्या तय करेगा।
यही नहीं यदि किसी कैदी के मामले में कोर्ट की ओर से कोई निर्देश जारी होता है तो उस कैदी की जेल संख्या उस अनुसार ही तय होगी।
एक जेल में रहेंगे ब्लड रिलेशन वाले
इसी प्रकार एस और वाई से नाम व ब्लड रिलेशन वाले कैदियों को जेल संख्या एक में रखा जाएगा। 10 वर्ष या इससे अधिक सजा पाए, एनएसए लगे और सिविल प्रिजनर्स को भी जेल संख्या दो में रखने की व्यवस्था की गई है।
बी, वी, सी, डी, ई, एफ और जी से नाम की शुरुआत वालों को जेल संख्या तीन में जबकि ए और आर नाम वालों को जेल संख्या चार में रखा जाएगा।
10 वर्ष से कम सजा पाने वाले जेल संख्या पांच और सभी महिला कैदियों को जेल संख्या छह में रखा जाएगा। 18 से 20 वर्ष के कैदियों को सात नंबर जेल में स्थान मिलेगा।
जे, जेड, एल, एम और एन नाम वालों को जेल संख्या आठ और नौ में ले जाया जाएगा। जबकि एच, आई, के, क्यू, ओ, पी, टी, यू और डब्ल्यू वाले रोहिणी जेल में रहेंगे।
वीआईपी मानी जाती है जेल संख्या चार
अभी तक जेल संख्या चार को वीआईपी जेल माना जाता है। वीआईपी जेल इसलिए क्योंकि यहां बड़े-बड़े मामलों में रसूखदार कैदी बंद होते हैं।
जेल संख्या चार में नई दिल्ली इलाके के आरोपी आते हैं, इसी जेल में पूर्व संचार मंत्री ए राजा व टेलीकॉम घोटाले में बंद कुछ दूसरे आरोपी भी थे। इसी जेल में कॉमनवेल्थ के आरोपी सुरेश कलमाडी बंद हुए थे।
एक ही मामले में बंद आरोपी जेल में अपना ग्रुप बना लेते हैं और आपस में अक्सर मारपीट करते हैं। ऐसे कैदी आपस में बदला लेने के लिए गैंग बनाते हैं और ब्लेड बाजी के अलावा अन्य तरीके से एक-दूसरे पर हमले की फिराक में रहते हैं। कैदियों के गैंग को खत्म करने के लिए इस तरह की व्यवस्था शुरू की जा रही है।
तिहाड़ जेल के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल, मुकेश प्रसाद ने बताया कि, पहले भी इस तरह की व्यवस्था तिहाड़ जेल में थी। कोर्ट की छुट्टियां शुरू होते ही जब कैदी वाहन उपलब्ध होंगे तब 25 दिसंबर से कैदियों को उनके नाम के अनुसार जेल में शिफ्ट करना शुरु कर दिया जाएगा।