ब्रिटेन में नए स्ट्रेन का मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। अदालत ने दिल्ली सरकार को ब्रिटेन से आने वाले यात्रियों की जांच पहले से दिए गए दिशा निर्देशों के तहत जांच सुनिश्चित करे। अदालत ने कहा सरकार उनकी रैपिड एंटीजेन टेस्ट के बदले आरटी-पीसीआर की जांच पर ज्यादा ध्यान दे। साथ ही उनके क्वॉरेंटाइन की भी उपयुक्त व्यवस्था सुनिश्चित करें। इसके अलावा संक्रमण और कहीं नहीं फैलने को लेकर सभी उपयुक्त ठोस कदम उठाए।
न्यायमूर्ति हीमा कोहली व न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने दिल्ली-यूके की फ्लाइट बंद होने से पूर्व बड़ी संख्या में यात्रियों के यूके से भारत आने के मद्देनजर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए।
अदालत ने सरकार को कोरोना से ठीक हुए मरीजों को होने वाले परेशानियों को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम गठित करने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा उनकी जांच कर उनके होने वाले परेशानियों को दूर करें, जिससे कोरोना से ठीक हुए मरीज पहले की तरह अपना जिंदगी जी सकें। वह इस बाबत मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को दो सप्ताह में तैयार करें।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह माना कि राजधानी में कोविड 19 को लेकर हालत पहले से सुधर रहें हैं। पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी पूर्व के मुकाबले घटी है।वहीं, सरकार ने कोर्ट को बताया कि दिसंबर 11 से दिसंबर 21 के बीच कुल 871243 जांच की गई। इसमें से 452428 आरटीपीसीआर थी। इसके अलावा कांटेक्ट ट्रेसिंग बढ़ाई गई है। जहां पॉजिटीव रेट अधिक है वहां कटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। अदालत ने रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए कहा कि तस्वीर अभी उत्साहजनक है।
अदालत ने कहा कि दिल्ली सरकार ने उन क्षेत्रों में संपर्क ट्रेसिंग को बढ़ाने और अधिक नियंत्रण क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव दिया जहां सकारात्मकता दर अधिक थी। अदालत ने सरकार को इस दिशा में उचित कदम जारी रखने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी तय की है। अदालत अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। जिसमें कोविड 19 के हालत व जांच बढ़ाने को कहा गया था। सरकार की तरफ से अधिवक्ता सत्यकाम पेश हुए।