आयोग ने 15 मई से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए डीजी सेट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद आयोग ने 31 अक्तूबर से भी एनसीआर में डीजी सेट पर पूरी तरह से कड़ा प्रतिबंध जारी किया था। अब आपातकालीन सेवाओं एवं आवासीय सोसाइटियों में इस्तेमाल किए जा रहे डीजी सेट के संचालकों को इस अवधि में प्रदूषण नियंत्रण की शर्तों के साथ इसे चलाने की अनुमति होगी। वायु गुणवत्ता आयोग ने कहा है कि अगले साल एक जनवरी से रिट्रोफिट और विशेष तौर पर वायु प्रदूषण को कम करने वाले डीजी सेट ही चल सकेंगे। हर साल दिल्ली समेत समूचे एनसीआर को अक्तूबर से दिसंबर तक वायु प्रदूषण की मार झेलनी पड़ती है। उसका एक बड़ा कारण डीजी सेट भी हैं।
आवासीय सोसाइटियों से लेकर आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होंगे डीजी सेट
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह डिजी सेट विभिन्न आवासीय एवं वाणिज्यिक इमारतों, लिफ्ट, एस्केलेटर, ट्रैवलेटर, चिकित्सीय सेवाओं, अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य देखभाल सुविधा, जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों, और दवाओं के निर्माण में शामिल इकाइयों, रेलवे सेवाओं, रेलवे स्टेशन, ट्रेनों और स्टेशनों समेत मेट्रो रेल और एमटीआरएस सेवाओं, हवाई अड्डे, अंतर राज्य बस टर्मिनल (आईएसबीटी), गंदा पानी साफ करने के संयंत्र, जल पंपिंग स्टेशन, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं, दूरसंचार एवं आईटी डेटा सेवाओं और अन्य सूचीबद्ध आपातकालीन सेवाओं में डीजी सेट के इस्तेमाल की छूट होगी।
ऊंची इमारतों के निवासियों के कड़े विरोध के चलते लिया फैसला
वायु गुणवत्ता आयोग ने यह छूट के आवश्यक सेवाओं, ऊंची इमारत में रहने वाले लोगों के कड़े आक्रोश को देखते हुए लिया है। कई आवासीय कल्याण संगठन (आरडब्ल्यूए) आयोग के प्रतिबंधों का कड़ा विरोध कर रही थीं। विभिन्न आरडब्ल्यूए के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस आदेश को लागू करने से पहले राज्यों को बिजली की 24 घंटा सातों दिन आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके अलावा एनसीआर में एकमात्र पीएनजी प्रदाता इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) को पूरे एनसीआर में अपना नेटवर्क बढ़ाने की मांग की गई थी।
एक अक्तूबर से लागू होना है ग्रेप
दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता (एक्यूआई) के स्तर को सुधारने के लिए ग्रेप एक अक्तूबर से पूरे एनसीआर में लागू हो जाएगा। लेकिन अब इसके कार्यान्वयन अवधि के दौरान भी डीजी सेट चलाने की अनुमति दी जा रही है।ग्रेप नियमों को कड़ाई से पालन कराने पर अस्पताल, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य देखभाल केंद्र, रेलवे, मेट्रो रेल, हवाई अड्डे, रक्षा प्रतिष्ठानों, दूरसंचार, आईटी डाटा सेंटर जैसी आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा था।