2005 की एसिड अटैक की घटना ने नरसिन जहां को पूरी तरह से डरा कर रख दिया था। उसके चेहरे पर लगा नकाब उसे उस बुरे दिन की बार-बार याद दिलाता है। लेकिन पटकथा लेखिका मेघा रामास्वामी की लघु फिल्म 'न्यू बॉर्न' में, नरसिन ने पहली बार अपना नकाब हटा कर कैमरे के सामने खुलकर बात की।
उसने अटैक होने तक और उसके बाद के डर को बयां किया। मेघा ने कहा कि मेरे बिना कहे ही उसने अपना नकाब खोलकर आराम से बात की। आठ मिनट की इस फिल्म का प्रसारण नौ सितंबर को टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में शॉर्ट कट इंटरनेशल प्रोग्राम के अंर्तगत किया जायेगा। इस साल विश्व की आठ फिल्मों में मेघा की फिल्म सबसे अलग है, जिसमें भारत में एसिड अटैक के बाद पीड़ित कैसे अपनी संघर्ष पूर्ण जीवन को सामान्य तरीके से जीते है बताया गया है।
मेघा ने कहा कि न्यू बॉर्न कोई फिल्म प्रोजेक्ट नहीं है और न ही लोग इसे फिल्म की तरह लें, मैं खाली थी और कोई फिल्म नहीं करना चाहती थी। तो मैनें देश में एसिड अटैक से मिलता जुलते होने वाले हमलों के बारे में रिसर्च करना शुरू किया और इस बीच मुझे एक साथी मिल गयी जो इस घटना से जूझ चुकी थी, जहां उसे सनसनीखेज बातें पता चली।