स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षणिक सत्र 2024-25 शुरू हो चुका है। नए सत्र से तीसरी व छठी कक्षा का पाठ्यक्रम भी बदल गया है, लेकिन अभी बच्चों को नए पाठ्यक्रम के आधार पर एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिल रही हैं।
कुछ स्कूलों में जहां पुराने पाठ्यक्रम से पढ़ाई हो रही है तो निजी स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से पढ़ाई करा रहे हैं। मौजूदा समय में बाजारों में पुराने पाठ्यक्रम की पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। कहा जा रहा है कि अप्रैल के अंत तक व मई के मध्य तक दोनों कक्षाओं की किताबें उपलब्ध हो जाएंगी।
तीसरी व छठी कक्षा की किताबें नहीं मिलने से अभिभावक काफी परेशान हैं। एक तो दोनों कक्षाओं का सिलेबस बदल गया है और सत्र शुरू हो गया है लेकिन किताबें नहीं मिल रही हैं। अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लेनी पड़ रही हैं, जबकि एनसीईआरटी की किताबें निजी प्रकाशकों के मुकाबले में सस्ती होती हैं। निजी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों ने स्कूलों के माध्यम से इन्हें खरीद भी लिया है।
वहीं अब उन्हें यह डर है कि जब बाजारों में एनसीईआरटी की पुस्तकें आएंगी तो स्कूल उन्हें खरीदने के लिए भी कहेंगे। इससे उन पर दोहरा बोझ पड़ेगा। वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को यह चिंता सता रही है कि बिना किताबों के बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी।
मालूम हो कि सत्र की शुरुआत से पहले ही एनसीईआरटी ने घोषणा कर दी थी कि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण नए सत्र से तीसरी से छठी कक्षा की एनसीईआरटी की किताबें बदल जाएंगी। एनसीईआरटी इस बात का प्रयास कर रही है कि तीसरी और छठी कक्षा की किताबें अप्रैल व मई महीने में जारी कर दें। तीसरी कक्षा की अप्रैल के अंत तक और छठी कक्षा की मई के मध्य तक बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। एनसीईआरटी की ओर से अन्य कक्षाओं की भी कुछ पुस्तकें मई में बाजार में उपलब्ध करा दी जाएंगी।