सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर 3:10 बजे हुए भीषण हादसे की गूंज अगले दिन भी पूरे इलाके में सुनाई देती रही। बुधवार को जब अचानक आई एक तेज धमाके जैसी आवाज ने पूरे इलाके को दहला दिया था और देखते ही देखते चार मंजिला पुराना मकान जमींदोज होकर धूल के गुबार में तब्दील हो गया था, तब स्थानीय लोग ही सबसे बड़े सहारा बने थे।
प्रशासन से पहले पड़ोसियों ने किया रेस्क्यू
मलबे के नीचे से उठती चीख-पुकार के बीच प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही पड़ोसियों ने बिना अपनी जान की परवाह किए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था। बुधवार दोपहर 3:10 बजे की उस घटना को याद कर आज भी स्थानीय लोगों की रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मकान गिरते ही चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई थी।
संकरी गलियों में भर गया था मलबा
हादसे के तुरंत बाद इलाके में दहशत फैल सकती थी, लेकिन स्थानीय निवासी तमाशबीन बनने के बजाय तुरंत आगे आए और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की जंग शुरू कर दी। संकरी गलियों में भारी मलबा फैला होने के बावजूद लोगों का हौसला कम नहीं हुआ।
अपनी जान जोखिम में डालकर मलबे में उतरे लोग
जब तक पुलिस और दमकल विभाग की राहत-बचाव टीम मौके पर पहुंचती, उससे पहले ही पड़ोसियों ने बिना अपनी जान की परवाह किए मलबे से पत्थर और ईंटें हटाना शुरू कर दिया था। संकरी गलियों और ढह चुके ढांचे के खतरे के बीच स्थानीय युवकों और महिलाओं ने नंगे हाथों से मलबा हटाया।
स्थानीय लोगों ने पांच लोगों को निकाला बाहर
लोगों की इसी मुस्तैदी की वजह से प्रशासन की टीम के पहुंचने से पहले ही पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। सबसे राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों द्वारा निकाले गए सभी पांचों लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। बाद में पहुंची प्रशासनिक टीम ने कटर और क्रेन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन को आगे बढ़ाया।
बदहवासी के बीच जब मिसाल बनी इंसानियत
मलबे के बीच से जिंदगियां तलाशने में स्थानीय निवासी रुकैया, नाजिमा और यामीन ने मुख्य भूमिका निभाई। तीनों ने अन्य पड़ोसियों के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। किसी ने लोहे की छड़ें हटाईं तो किसी ने धूल से घुटते लोगों तक हवा और पानी पहुंचाया। स्थानीय लोगों की इस एकजुटता की वजह से एक बड़ा हादसा होने के बावजूद कई जिंदगियां काल के गाल में समाने से बच गईं।