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'नेहरू ने उलझाया कश्मीर, हिंदुओं को हम अनाथ नहीं छोड़ सकते'

Sun, 13 Dec 2015 04:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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 जवाहर लाल नेहरू के आग्रह-दुराग्रह ने जम्मू-कश्मीर प्रकरण को उलझाने में भूमिका निभाई। उनका आग्रह शेख अब्दुल्ला के लिए था और दुराग्रह महाराजा हरी सिंह के लिए। देश जब आजाद हुआ था तो भारत और पाकिस्तान ने अल्पसंख्यकों को विशेष तरजीह देने की बात कही थी।
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लेकिन पाकिस्तान ने दगाबाजी की। पूर्वी पाकिस्तान के हिंदुओं को हम अनाथ नहीं छोड़ सकते। ये विचार गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने दिल्ली के दीनदयाल शोध संस्थान सभागार में ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और कश्मीर समस्या’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर कही।

इस पुस्तक को ओपी कोहली की पुत्री ऋतु कोहली ने लिखा है और इसे प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने कहा कि भारत का इतिहास राजनीतिक सोच का था। जम्मू-कश्मीर पूर्णतया भारत नहीं है, इसे पुष्ट करने की कोशिश की गई।
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'टर्निंग प्वाइंट पर है कश्मीर'

जम्मू के महाराजा हरि सिंह आजाद रहना चाहते थे, इस भ्रांति को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर टर्निंग प्वाइंट पर है। वहां के लोग अब बदलाव चाहते हैं। पाकिस्तानियों को पता चल गया है कि पाकिस्तान फेल स्टेट है और ज्यादा दिनों तक चलने वाला नहीं है।

इस विषय पर चर्चा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए 1940 से 1953 तक अध्ययन की आवश्यकता है। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख अरुण कुमार बतौर विशिष्ट वक्ता मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सूचनाओं की विकृति है। पिछले इतिहास में तथ्य नहीं है, इसलिए इतिहास में दोबारा जाना होगा। उन्होंने कहा कि हरि सिंह के मन में अनिर्णय नहीं था। वह भारत में विलय करना चाहते थे।

 डॉ. श्यामा प्रसाद मुकर्जी का विश्वास लोकतंत्र को मजबूत करने में था। देश को ठीक-ठीक चलना है तो उनके दिखाए रास्ते पर चलना होगा। जम्मू-कश्मीर को लेकर स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन प्रभात कुमार ने किया।
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