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फरीदाबाद में नेहरू के ‘सपनों’ पर अतिक्रमण

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‘जवाहर लाल नेहरू ने अपने सपनों का आधुनिक भारत बनाने के लिए फरीदाबाद बसाने की परियोजना को एक प्रयोगशाला के रूप में देखा। इसीलिए उन्होंने यहां औद्योगिक विकास की नींव रखी’। गांधीवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और योजना आयोग के पूर्व सदस्य एलसी जैन ने यह बात अपनी पुस्तक ‘द सिटी ऑफ होप’ में लिखी है।
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औद्योगिक विकास तो हुआ लेकिन जिस नए फरीदाबाद शहर को बसाने और सुंदर रूप दिलाने के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने मेहनत की, उसी के बाशिंदों ने महज 65 साल में ही इसका मूल स्परूप बिगाड़ दिया। फरीदाबाद विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद और पं. जवाहर लाल नेहरू का सपना इसे चंडीगढ़ की तर्ज पर विकसित करने का था।

इसीलिए उन्होंने इसका डिजाइन जर्मनी के मशहूर आर्किटेक्ट निस्सन से बनवाया। लेकिन आज अतिक्रमण की वजह से ऐसा लगता है जैसे कि इस शहर का दम घुट रहा हो।

शहर में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका डालने वाले समाजसेवी कृष्णलाल गेरा कहते हैं कि नेहरू जी की आत्मा इस शहर के बिगड़े स्वरूप को देखकर दुखी हो रही होगी।
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शहर के अधिकांश पार्कों पर हो चुका है कब्जा

क्षेत्र में हजारों अवैध निर्माण हैं, जिनसे निगम को करोड़ों का नुकसान हुआ है और आम लोगों की परेशानी बढ़ी है। पुनर्वास विभाग ने 3453 एकड़ में यहां औद्योगिक एवं रिहायशी क्षेत्र विकसित किया। इसमें 233 से लेकर 500 गज तक के प्लाट काटे गए थे।

देश के विभाजन के समय विस्थापितों के लिए आवास एवं कारोबारी लिहाज से निस्सन ने एनआईटी को इस तरह से डिजाइन किया था जिससे यह एक साफ-सुथरा शहर बनता। निस्सन ने एनएच (नेबर हुड) एक, दो, तीन, चार एवं पांच बनाया, जिसमें बाजार भी थे। हर ब्लॉक में पार्क थे। जिनमें से कइयों पर तो कब्जा हो चुका है।

एक, दो, तीन एवं पांच में तो रिहायशी क्षेत्र बने, लेकिन एनएच-4 को केंद्र सरकार ने अपने कार्यालय बनाने के लिए ले लिया। केंद्र सरकार के कार्यालय होने के कारण एनएच-4 आज भी साफ सुथरा एवं खुला है।

अन्य क्षेत्रों में अतिक्रमण एवं अवैध निर्माणों से उसका मूल स्वरूप ही बदल गया। इसके खिलाफ गेरा ने वर्ष 2006 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन नगर निगम ने कागजी खानापूर्ति के अलावा कुछ नहीं किया।
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मूल स्वरूप बदलने से क्या हुई परेशानी

-जितनी आबादी और संसाधनों को ध्यान में रखकर इस शहर का खाका खींचा गया था उन पर दबाव बढ़ गया। इससे बिजली और पानी का संकट बढ़ा। सड़कों और बाजारों में जाम की स्थिति पैदा हुई। सीवर लाइन ओवरफ्लो होने लगीं। अतिक्रमण से ऐसी हालत हो गई कि कई जगहों पर आगजनी होने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी वहां नहीं पहुंच सकती। इससे सरकार को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि बिना नक्शा पास करवाए और संबंधित फीस दिए ही अवैध रूप से निर्माण किए गए।

-पंडित जवाहर लाल नेहरू के आदेश के बाद 17 अक्तूबर 1949 को भगत सिंह चौक पर (एनएच-पांच) पहला फावड़ा चलाकर शहर को बसाने का काम शुरू किया गया था। भारत-पाक विभाजन की त्रासदी झेलकर आए लोगों के लिए देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने दिल्ली के सटे फरीदाबाद में आंदोलन के बाद जमीन दी। इसमें पेशावर, हजारा, मर्दाना, कोहाट, बन्नू एवं डेरा इस्माईल खान आदि फ्रंटियर इलाके से करीब 50 हजार शरणार्थियों ने आकर बसना शुरू किया।

-नेहरू जी की कोशिश से शहर में पहली फैक्ट्री बाटा खुली।
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