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अफसरों की लापरवाही, बढ़ा रही बिजली संकट

Thu, 19 Jun 2014 04:20 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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महानगर का बिजली संकट केवल सप्लाई की कमी नहीं है, यह जर्जर पावर स्ट्रक्चर की देन है। पावर स्ट्रक्चर की कमजोरी भी अफसरों की लापरवाही से है। यही कारण है कि जिन 72 पावर स्टेशनों का परीक्षण किया गया, उनमें से 70 की स्थिति गड़बड़ मिली है।
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ऐसे में उपलब्ध सप्लाई भी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रही है। इसका मुख्य कारण डिस्ट्रीब्यूशन के पावर स्टेशन हैं। दो माह में 72 पावर स्टेशनों का परीक्षण किया गया, इनमें से 70 की हालत खस्ता मिली है। कविनगर और राजनगर पावर स्टेशनों के अलावा अन्य पर सबसे ज्यादा कटौती और फाल्ट के मामले सामने आए हैं।

ट्रांसमिशन रिकार्ड में जिले में बिजली की उपलब्धता 24 घंटे है। इसकी सप्लाई भी वह प्रापर कर रहा है। इंडस्ट्रियल सेक्टर को 24 घंटे बिजली मिल रही है। उनके पावर स्टेशनों में फाल्ट आने की घटनाएं भी नाममात्र हैं। डिस्ट्रीब्यूशन को भी 22-24 घंटे की सप्लाई ट्रांसमिशन से मिल रही है, जबकि उपभोक्ताओं को मिल रही है औसतन 14-15 घंटे।
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कारपोरेशन की ओर से पावर स्टेशनों के मेंटीनेंस के लिए बजट और सामान की बाध्यता नहीं है। इनको तत्काल जारी किया जा रहा है, इसके बावजूद पावर स्टेशनों पर काम नहीं हो रहा है। दरअसल गड़बड़ी का कारण अफसरों की लापरवाही है। अधिकारी पावर स्टेशनों की देखभाल केवल फाइलों में कर रहे हैं।
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एमडी की जांच में मिलीं थीं यह गड़बड़ियां
- पावर स्टेशनों के मुख्य ट्रांसफार्मरों में तेल की कमी
- पावर स्टेशनों पर अर्थिंग ठीक प्रकार से न होना
- केबल और कंडक्टर की ज्वाइंट गड़बड़ होना
- पावर स्टेशनों को बेवजह ओवरलोड चलाना
- निर्धारित समय पर सर्विस नहीं कराया जाना
- फ्यूज और एक्सट्रा केबल यूज की जानकारी न होना
- ब्रेकर को ठीक नहीं कराया जाना
- पावर स्टेशनों का संचालन अनट्रेंड लोगों से कराना
- सप्लाई देते वक्त लोड सिस्टम की जानकारी न होना
- आला अफसरों द्वारा पावर स्टेशनों का औचक परीक्षण न किया जाना

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