जामिया मेरे लिए सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि मेरे खून के कतरे-कतरे में बसा है। जामिया से मेरा भावनात्मक रिश्ता भी है। यह एक ऐतिहासिक पल है, जब मुझे जामिया में तिरंगा फहराने का मौका मिला है।
मेरे नाना मौलाना अब्दुल कलाम आजाद इसी जामिया के संस्थापकों में से एक हैं। यह बात जामिया की पहली महिला व नई कुलाधिपति डॉ. नजमा हेपतुल्ला ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पदभार संभालाने के बाद छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कही।
डॉ. अंसारी ऑडिटोरियम में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में डॉ. हेपतुल्ला ने कहा कि जामिया से कई स्वतंत्रता सैनानियों का नाम जुड़ा रहा है, जिन्होंने हिंदोस्तान की आजादी की कहानी की शुरुआत लिखी और अब मुझे काम का मौका मिला है।