राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव के अंतिम दिन कांग्रेस ने पंजाब के मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को प्रचार में उतारा। सिद्धू ने प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन, पूर्व सांसद महाबल मिश्रा, प्रत्याशी मीनाक्षी चंदेला के साथ रोड शो किया। रोड शो ख्याला गांव के चंदेला मैदान से शुरू हुआ और राजौरी गार्डन में खत्म हुआ। ठोको ताली और वाह गुरु शब्दावली के लिए मशहूर कांग्रेस नेता सिद्धू ने कहा कि भाजपा-शिरोमणि अकाली प्रत्याशी चुनाव में माफिया का पैसा खर्च कर रहे हैं।
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सिद्धू बोले- हमारी लड़ाई हराम और ईमान के बीच
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब चुनाव जीतने के बाद पहली बार रोड शो में आए सिद्धू ने कहा है कि लड़ाई हराम और ईमान के बीच है। एक तरफ सेवा ही सेवा है तो दूसरी तरफ 10 फीसदी सेवा और 90 फीसदी मेवा है। कांग्रेस प्रत्याशी वो मजबूत विकेट है जिसे पैसा और किसी अन्य तरह से गिराया नहीं जा सकता है। भाजपा-शिरोमणि अकाली प्रत्याशी मनजिंदर सिंह सिरसा को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का चेला करार देते हुए सिद्धू ने कहा, ये जो पंजाब में ड्रग माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया और केबल माफिया से पैसा कमाया है, उनका चेला यहां आकर लगा रहा है।
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आप को लेकर ली चुटकी
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नवजोत सिंह सिद्धू
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धू ने कहा, अंधा गुरु, बहरा चेला, नर्क में भी ठेलम-ठेला। मतदाताओं से कहा कि इंसाफ का तराजू लेकर सेवा को वोट देना। ये जीत धर्म की होगी। ये लोग समझते हैं कि हराम के पैसे से चुनाव जीता जाता है। एक की रोटी में दूध है, दूसरे की रोटी में खून है। जनता की आवाज में परमात्मा की आवाज है। एक शेर के साथ सिद्धू ने कहा कि राजौरी गार्डन में चंदेला और कांग्रेस को कोई दबा नहीं सकता।
कांग्रेस के लिए क्यों खास है राजौरी गार्डन सीट?
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नवजोत सिंह सिद्धू
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हालांकि, यह केवल एक उपचुनाव है, लेकिन कांग्रेस को लगता है कि अगर उसने यह एक विधानसभा सीट जीत ली तो इससे दिल्ली में अपनी वापसी का संदेश दे सकेगी. यही कारण है कि पार्टी इस सीट पर पूरी ताकत लगा रही है। कांग्रेस ने मीनाक्षी चंदीला को अपना उम्मीदवार बनाया है. नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन के साथ यहां रोड-शो के दौरान कहा कि 'इंसाफ का तराजू उठाकर एक सेवक को जिताना है. एक पैराशूटर है दूसरा ग्रास रूटर है. हर जगह चंदीला साहब जैसे वर्कर नहीं होते।'
राजौरी गार्डन सिख-पंजाबी बहुल सीट है। इस पर रविवार नौ अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. चुनाव के नतीजे 13 अप्रैल को आएंगे। इसका सीधा मनोवैज्ञानिक असर 23 अप्रैल को होने वाले नगर निगम चुनाव पर पड़ सकता है।