शुक्रवार को मां सिद्धिदात्री के पूजा के साथ ही नवरात्र का समापन हुआ। मंदिरों में पूजा के बाद हवन किया गया। नवमी पूजन करने वाले भक्तों ने हवन करने के बाद कन्याओं को भोजन कराया।
दिल्ली गेट मंदिर में पूजन के लिए सुबह से भक्तों की भीड़ रही। पूजन और हवन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। शाम को मंदिर में भजन-कीर्तन हुए।
भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया, इसके साथ ही भक्तों को माता का खजाना प्रसाद के रूप में दिया गया। महंत परमानंद गिरि ने बताया कि मंदिर में हर साल विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।
गुफा वाले मंदिर में भी पूजन के बाद पूड़ी हलवे का प्रसाद वितरित किया गया। मंदिरों के अलावा शहर में जगह-जगह भंडारे का आयोजन हुआ। इसके अलावा नेहरू नगर शिव मंदिर, स्वयंभू शिव मंदिर सहित सभी मंदिरों में हवन और पूजन हुई।
दुर्गा पंडालों में नवमी और दशमी की हुई पूजा
नवमी और दशमी एक ही दिन होने के कारण दुर्गा पंडालों में भी नवमी और दशमी की पूजा एक ही दिन की गई। सुबह की पूजा के बाद दोपहर में मूर्ति विसर्जन किया गया। मूर्ति विसर्जन से पहले विभिन्न पंडालों में महिलाओं ने सिंदूर खेला किया।
बंगाली समाज में माता के विसर्जन से पहले महिलाएं सिंदूर से होली खेलती हैं। गाजियाबाद काली बाड़ी समिति संजय नगर में सुबह पूजा, सिंदूर खेला के बाद विसर्जन हुआ। बंगाली कल्चरल सोसायटी कविनगर में पूजा और आरती के बाद महिलाओं ने सिंदूर खेला किया।
उसके बाद नाचते-गाते मां दुर्गा की मूर्ति मुरादनगर गंगनहर में किया गया। इस मौके पर अध्यक्ष एस दास गुप्ता, समीर बनर्जी और अरिंदम राय सहित महिलाएं और पुरुष और बच्चे शामिल रहे।