आम आदमी पार्टी (आप) की खेमेबंदी थमने का नाम नहीं ले रही है। दोनों गुटों में सुलह-समझौते की कोशिशों के बीच राष्ट्रीय परिषद की बैठक पर तकरार शुरू हो गई है। राजस्थान से ‘आप’ नेता राकेश पारिख ने परिषद के सदस्यों की 27 मार्च को बैठक बुलाई है। जबकि पार्टी इस तरह की किसी बैठक से इनकार कर रही है। ‘आप’ का कहना है कि परिषद की एक दिवसीय बैठक 28 मार्च को है।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो परिषद की बैठक बुलाने की एक प्रक्रिया है। किसी प्रांत के किसी नेता को बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं है। फिलहाल परिषद की बैठक 28 मार्च को बुलाई गई है। ‘आप’ ने इसका एजेंडा भी तय कर लिया है।
सूत्रों की मानें तो परिषद की बैठक में योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण के खिलाफ प्रस्ताव लाया जा सकता है। टीम केजरीवाल की कोशिश है कि दिल्ली चुनाव को आधार बनाकर दोनों नेताओं को कटघरे में खड़ा किया जाए। सूत्र बताते हैं कि चुनाव में दोनों नेताओं की भूमिका खास नहीं रही है। जीत पक्की देखकर आखिरी वक्त में योगेंद्र यादव सक्रिय हुए। लेकिन उनकी संगठन निर्माण, उम्मीदवारों के चयन व प्रचार अभियान की रणनीति बनाने में कोई भूमिका नहीं रही। वहीं, प्रशांत भूषण पूरे चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों की शिकायती चिट्ठी लेकर घूमते रहे। इतना ही नहीं, चुनाव प्रचार के दौरान कई बार दोनों नेता एक सुर में पार्टी के खिलाफ बोलते दिखे।