शहीद विजय सिंह पथिक क्रिकेट स्टेडियम में अफगानिस्तान और नामीबिया के बीच इंटरनेशनल आईकप के लिए रविवार से आमने-सामने होंगी। अफगानिसतान क्रिकेट बोर्ड अपनी टीम को विश्व में नंबर वन टीम बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और इसी के चलते अफगान क्रिकेट बोर्ड ने भारत के ग्रेनो स्थित स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बना लिया है।
वहीं, इनसे टक्कर लेने के लिए नामीबिया के क्रिकेटर भी तैयार है। नामीबिया में क्रिकेट को तीसरे नंबर पर लिया जाता है। पहले स्थान पर रगवी और दूसरे स्थान पर फुटबाल खेली जाती है। इन खेलों से जो लोग अलग खेलना चाहते हैं वह क्रिकेट खेलते हैं जबकि कुछ खिलाड़ी तो अभी पढ़ाई ही कर रहे हैं। पेश नामीबिया के क्रिकेटरों से बातचीत के कुछ अंश।
भारतीय मूल के रहने वाले और नामीबिया के कोच दयानंद ठाकुर बताते हैं कि उनके पूर्व भारत से न्यूजलेंड गए। वहां से वह खेलने के लिए नामीबिया गए थे और वहीं पर उन्हें एक लड़की से शादी करके बस गए। इसके बाद वहां पर नामीबिया के लिए क्रिकेट खेला तथा मौजूदा समय में वह नामीबिया टीम को कोचिंग दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत की तरह नामीबिया में क्रिकेट को इतना प्रेम नहीं करते हैं। इसलिए वहां पर क्रिकेट खेलने वाले अधिक्तर खिलाड़ी जॉब करते हैं और पार्टटाइम के लिए ही क्रिकेट मैच खेलते हैं।
कोच दयानंद ठाकुर का कहना है कि उनकी टीम के पांच खिलाड़ी इस समय जाब करत हुए क्रिकेट खेल रहे हैं मगर उन्हें फिर भी पूरा विश्वास है कि वह अफगानिस्तान टीम से आईकप को जीतकर ले जाएंगे। उन्होंने बताया कि सोरेल बर्जर, गैरी सायमन, निकलेलाओस स्डाल्टस, हालोआ या फ्रांस और क्रिस्टोफर कोर्बे जॉब और बिजनेस करते हैं।
बकि उनकी टीम के गेरहार्ड इरोजमस, लोहन लोरेंस, जेन ग्रीन और एपी कोटजे ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। नामीबिया टीम के कप्तान सोरेल बर्जर ने बताया कि वह अपनी एक कंस्ट्रक्शन की कंपनी चलाते हैं और सुबह से शाम तक उसी काम को समय देते हैं।
इसके बाद जब वह शाम को आते हैं तो दोस्तों एवं टीम के मैम्बरों के साथ क्रिकेट प्रैक्टिस करते हैं। वह 16 साल से क्रिकेट खेल रहे हैं और साल 2003 में भारत के खिलाफ वल्र्ड कप में खेले थे। वह बतातस्त्रे हैं कि नामीबिया में क्रिकेट का चार्म नहीं है और इसलिए वह अपने भविष्य को लेकर सचेत हैं तथा पहले से ही अपना स्वयं का काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नामीबिया में क्रिकेटरों को रिटायर होने के बाद आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और अपना करियर नए तरीके से ही शुरू करना होता है। इसलिए ज्यादातर क्रिकेटर अपना शुरू से ही काम करना पसंद करते हैं।
जो वह और उनके कुछ साथी अभी भी कर रहे हैं। यदि भारत की तरह नामीबियव के खिलाडिय़ों को सुविधाएं मिल जाएं तो वह भी टॉप थ्री टीम में आ जाएंगे। इंडिया टीम को लेकर उन्होंने कहा कि सचिन तेंदुलकर की तुलना किसी भी खिलाड़ी से नहीं हो सकती है। 2003 में जिस तरह उन्होंने नामीबिया टीम को झटका दिस्त्रया था वह हभर भले ही गए थे लेकिन आज भी उनके कायल हैं। उन शाट्स को उनके प्लयेर प्ले करके देखते हैं।
गैरी सायमन कहते हैं कि सबसे पहले वह अपने देश का नाम रोशन करने के लिए क्रिकेट खेलते हैं और उसके बाद वह अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए खेलते हैं। वह बताते हैं कि उनका स्वयं का बिजनेस है और वह आम लोगों की तरह आठ घंटे का समय व्यवसाय को देते हैं जबकि बाकी समय में वह क्रिकेट खेलते हैं और परिवार के साथ बिताते हैं।
न्होंने कहा कि भारत के खिलाफ 2003 में खेले थे आज भी तमन्ना है कि वह भारत के क्रिकेटरों से मैच खेले भले ही वह हार जाएं। उनका कहना है कि भारत की टीम विश्व में नंबर वन पर है और विराट तो इन दिनों टीम के लिए हीरा है।
क्यों है नामीबिया में ऐसा
जानकार लोगों की माने तो नामीबिया में क्रिकेट खेल के प्रति काफी कम प्रेम है और जब क्रिकेटर खेल से रिटायर होते हैं तो उनको अपने आम जीवन में फिर से संघर्ष करते हैं और परिवार को सुविधाएं देना मुशकिल हो जाता है। क्रिकेटर एवं उनके परिवार को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े इसलिए भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जॉब या बिजनेस करते हैं।