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डीयू में जब मुस्लिम छात्र पर कसा गया तंज तो कलंक मिटाने के लिए उसने खोल दी मुस्लिम गोशाला

Sat, 14 Jan 2017 11:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
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- फोटो : अमर उजाला
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गोहत्या के लिए बदनाम मेवात इलाके से इसका कलंक हटाने के मकसद से करीब दो साल पहले मेवात (गुड़गांव) के शिक्षित युवाओं द्वारा गांव मोहम्मद नगर में शुरू की गई मुस्लिम गोशाला लोगों के लिए एक मिसाल बन रही है। 
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वहीं, गोशाला को सरकार और प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिलने से यह उपेक्षा का दंश भी झेल रही है। करीब 6 गायों के साथ शुरू हुई इस गोशाला में फिलहाल करीब 40 गाय हैं।

दो साल पहले इस गोशाला का उद्घाटन आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने पुन्हाना से विधायक रहीश खान और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष उमेर इलयासी की मौजूदगी में किया था।
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डीयू में तंज कसने के बाद ठानी गोशाला बनाने की बात

- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि मेवात जिले की अन्य गोशालाओं को जहां हर साल लाखों रुपये सरकार व प्रशासन की ओर से मिल चुके हैं। वहीं, मोहम्मद नगर की इस जीव रक्षा गोशाला को पिछले दो साल में  तीन किस्तों में मात्र 18 हजार रुपये ही मिल सके हैं।

गोशाला संचालकों में से एक आबिद हुसैन इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियर है, जबकी अमान खां दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमए कर रहे हैं। आबिद हुसैन ने बताया कि जब वह झज्जर से डिप्लोमा कर रहे थे, तो वहां के लोग मेवात में गोहत्या के बारे में उनसे काफी कुछ कहते थे और उनको सुनना पड़ता था।

ऐसा ही अमान खां का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मेवात में गोहत्या को लेकर उनके ऊपर छात्र काफी तंज कसते हैं। मेवात पर गोहत्या के लग रहे धब्बे को मिटाने के मकसद से आबिद और उसने मेवात में एक मुस्लिम गोशाला बनाने की ठान ली, जिससे इस कलंक को मिटाया जा सके। 
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गोशाला का कैसे चलता है खर्च

goshala
हर सप्ताह होगी है जांच:आबिद हुसैन ने बताया कि उनकी गोशाला की पशुपालन विभाग की ओर से हर सप्ताह जांच की जाती है। उन्होंने सभी गायों के कानों पर टैग लगा रखे हैं। जांच के लिये पशुपालन विभाग के डॉक्टर और डिप्टी डायरेक्टर अक्सर गोशाला का दौरा करते रहते हैं।

आबिद और आमन ने बताया कि भूसा तो घर के खेतों से हो जाता है और खल, दाना आदि के लिए अपने दोस्तों से मदद की गुजारिश करते हैं। इसी तरह गोशाला का खर्च चला रहे हैं।

यहां एक समाज के लोग आज भी उनको गलत नजर से देखते हैं। उनका यही नजरिया है कि हम गोशाला की आड़ में गो हत्या ही करते हैं। कुछ लोग नहीं चाहते कि मुस्लिम कोई गोशाला चलाएं। 
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