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लंदन और शंघाई की तरह बनेगा मेट्रो म्यूजियम, ऐसा होगा पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर

Fri, 14 Oct 2016 12:22 AM IST
बृजेश सिंह/अमर उजाला, नई दिल्ली
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metro - फोटो : अमर उजाला
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भारत में मेट्रो निर्माण की नींव कैसे पड़ी? वह कहां से शुरू हुई? किन तकनीकी का इस्तेमाल हुआ? दिल्ली जैैसी घनी आबादी वाले शहर में निर्माण के दौरान क्या मुश्किलें आईं? 
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विरासत में शामिल इमारतों के पास से मेट्रो कैसे गुजरी? मेट्रो के इतिहास से जुड़े इन सवालों के जवाब और कुछ अनसुनी कहानियां अब आने वाली नई पीढ़ी भी देख, सुन और समझ पाएगी। 

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) राजधानी में लंदन और शंघाई के तर्ज पर मेट्रो का इतिहास म्यूजियम बनाने जा रहा है। दिल्ली मेट्रो के प्रवक्ता अनुज दयाल के मुताबिक मेट्रो का वर्तमान में पटेल चौक पर म्यूजियम है। 
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वह जरूरत और सूचनाओं के लिहाज से छोटा है। डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भारत में मेट्रो की नींव उसकी तकनीकी को जाने। इसलिए हम म्यूजियम बना रहे हैं। लंदन में दुनिया का पहला मेट्रो म्यूजियम बना था, क्योंकि मेट्रो की शुरुआत भी लंदन से 1863 में भाप इंजन के साथ हुई थी।

2018 के अंत तक बन जाएगा मेट्रो म्यूजियम का इंफ्रास्ट्रक्चर

मेट्रो - फोटो : अमर उजाला
म्यूजियम का निर्माण किस तरह से बेहतर बनाया जा सके, इसके लिए मेट्रो की टीम दूसरे देशों के म्यूजियम का अध्ययन कर रही है। इसमें सबसे पुराने लंदन का ट्रांसपोर्ट म्यूजियम का टीम दौरा करके आ चुकी है। 

सबसे आधुनिक म्यूजियम शंघाई का दौरा करने जल्द ही एक टीम जाएगी। डीएमआरसी की कोशिश है कि मेट्रो दिल्ली में बनने वाले साउथ एशिया का सबसे बड़ा यह म्यूजियम इन दोनों का मिलाजुला रूप हो। नया म्यूजियम बनने के बाद पटेल चौक स्थित मौजूदा म्यूजियम बंद हो जाएगा।

भारत में बनने वाला साउथ एशिया का यह सबसे बड़ा मेट्रो म्यूजियम दिल्ली स्थित शास्त्री पार्क मेट्रो स्टेशन के पास बनाया जाएगा। यह 12,000 स्क्वायर मीटर एरिया में बनेगा। 

फिलहाल इस जगह पर सीआईएसएफ का परेड ग्राउंड है। इसे खाली कराने के बाद इस पर काम शुरू हो जाएगा। मेट्रो स्टेशन से सटा होने के कारण यहां लोगों को पहुंचना भी आसान होगा।
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शास्त्री पार्क में 1200 स्क्वायर फीट एरिया में बनाया जाएगा

दिल्ली मेट्रो
मेट्रो में इन्हें मिलेगी जगह
म्यूजियम में मॉडल ट्रेन, टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम), मेट्रो नेटवर्क के बारे में जानकारी उपलब्ध होगी। इसके अलावा मेट्रो की कोशिश है कि वह उस टेबल कुर्सियों को भी इसमें शामिल करेंगे जिसपर बैठकर मेट्रो की प्लानिंग हुई। 

30 साल बाद जब पहली मेट्रो ट्रेन का डिब्बा लाइन से हटेगा तो उसे भी वहां शामिल किया जाएगा। बच्चों को टीबीएम चलते हुए दिखाया जाएगा। इसके अलावा शोध छात्रों के लिए लाइब्रेरी होगी। बच्चों के लिए मेट्रो ट्रेन का मॉडल होगा। 

जिसकी पटरियों पर उतरकर वह उसे देख सकते हैं। इसके अलावा ऑडियो वीडियो हॉल होगा, जिसमें मेट्रो से जुड़ी फिल्में भी दिखाई जाएगी। निर्माण के दौरान खुदाई में मिले सामान को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

मेट्रो का इतिहास
1863 में स्टीम से चलने वाला पहली मेट्रो लंदन में बनी।
3.5 किलोमीटर लंबी थी पहली मेट्रो।
1910 में आई पहली इलेक्ट्रिक मेट्रो ट्रेन।

दिल्ली मेट्रो की फैक्ट फाइल
1998 में शुरू हुआ दिल्ली मेट्रो का निर्माण
2002 में पहली लाइन चालू हुई।
28 लाख यात्री रोजाना करते है सफर।
144 किलोमीटर लाइन पर परिचालन।
107 किलोमीटर फेज तीन में जुड़ेगा।
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