भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किस्मत न आजमा रही हो, लेकिन आम आदमी पार्टी की रणनीति पर उसकी नजर गढ़ी हुई थी। दिल्ली के नतीजे बताते हैं कि वोटर किसी दबाव में नहीं आता है। वोटर के बीच जो भी काम करेगा, उसे जनता नेता मानती है। आप पार्टी के जुझारूपन से केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा खुद को नहीं बचा सकी। इससे सपा उत्साहित है। सपाई इस बात को मानकर चल रहे हैं कि प्रदेश में लोगों का विश्वास जीत लिया जाए तो आगामी विधानसभा के चुनाव में भी किसी भी पार्टी से कड़ा मुकाबला आसानी से किया जा सकेगा।
दरअसल, 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हैं। प्रदेश में 2012 को जब सपा सरकार बनी थी तो लोगों से काफी वादे किए गए थे। सरकार का प्रयास चल रहा है कि सभी वादे पूरे कर लिए जाएं और सरकार किसी और के लिए नहीं सिर्फ जनता के लिए काम करे। हालांकि, इतना करने के बाद भी पिछले साल जब लोकसभा के चुनाव हुए तो सपा को सफलता नहीं मिली, लेकिन विधानसभा के उपचुनावों में फिर बाजी सपा ने ही मारी।