फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

AAP से सबक लेने आई थी 'टीम मुलायम'

विज्ञापन
विज्ञापन
भले ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी किस्मत न आजमा रही हो, लेकिन आम आदमी पार्टी की रणनीति पर उसकी नजर गढ़ी हुई थी। दिल्ली के नतीजे बताते हैं कि वोटर किसी दबाव में नहीं आता है। वोटर के बीच जो भी काम करेगा, उसे जनता नेता मानती है। आप पार्टी के जुझारूपन से केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा खुद को नहीं बचा सकी। इससे सपा उत्साहित है। सपाई इस बात को मानकर चल रहे हैं कि प्रदेश में लोगों का विश्वास जीत लिया जाए तो आगामी विधानसभा के चुनाव में भी किसी भी पार्टी से कड़ा मुकाबला आसानी से किया जा सकेगा।
विज्ञापन


दरअसल, 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हैं। प्रदेश में 2012 को जब सपा सरकार बनी थी तो लोगों से काफी वादे किए गए थे। सरकार का प्रयास चल रहा है कि सभी वादे पूरे कर लिए जाएं और सरकार किसी और के लिए नहीं सिर्फ जनता के लिए काम करे। हालांकि, इतना करने के बाद भी पिछले साल जब लोकसभा के चुनाव हुए तो सपा को सफलता नहीं मिली, लेकिन विधानसभा के उपचुनावों में फिर बाजी सपा ने ही मारी।
विज्ञापन

आप से लेगी समाजवादी पार्टी सबक

राजनीतिक जानकार डॉ. सीएस सिंह ने बताया कि लोकसभा में करारी हार के बाद सपा में मायूसी छाई थी। इसके बाद उपचुनावों में फिर से सपा ने ही ज्यादातर सीटों पर कब्जा कर लिया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में सपा ने लड़ना उचित नहीं समझा। जिस तरीके से महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के चुनावों में मोदी का जादू चला, उससे सपा के रणनीतिकार डरे हुए हैं कि कहीं उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी ऐसा ही न हो जाए।

सूत्र बताते हैं कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने विशेषज्ञों की टीम दिल्ली भेजी थी। किस तरह से आप नेताओं की कार्यशैली है। वोटरों से किस तरह से मिलते हैं। किस तरह से घुल-मिलकर उनका विश्वास जीतने में कामयाब रहे। दो सप्ताह पहले सपा मुखिया ने खुद ही नोएडा आकर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समीक्षा की थी। अब सपाइयों में आत्मविश्वास बढ़ गया है। इसका असर मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी पड़ा। बुुलंदशहर में अधिकारियों को फटकार लगाई और मेहनती कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें