दिल्ली के सातों सांसदों ने उठाए विकास से जुड़े बड़े मुद्दे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली की लंबित समस्याओं को लेकर राजधानी के सातों भाजपा सांसदों ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर जल्द समाधान की मांग उठाई। सांसदों ने कहा कि कई अहम मुद्दे वर्षों से लंबित हैं, जिन पर शीघ्र निर्णय लिया जाना जरूरी है ताकि दिल्ली के लोगों को राहत मिल सके। मुलाकात में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, मनोज तिवारी, योगेंद्र चंदोलिया, प्रवीण खंडेलवाल, कमलजीत सहरावत और बांसुरी स्वराज शामिल रहे। सभी सांसदों ने एक स्वर में राजधानी से जुड़े विभिन्न शहरी और ग्रामीण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सांसदों ने विशेष रूप से दिल्ली के पांच विधानसभा क्षेत्रों में स्थित करीब 200 कॉलोनियों का मुद्दा उठाया, जो ओ जोन में आने के कारण अनिश्चितता का सामना कर रही हैं। उन्होंने इन कॉलोनियों को ओ जोन से हटाने की मांग की, ताकि वहां रहने वाले लोगों को स्थायी राहत मिल सके। इसके अलावा 69 ऐसी एफ्लुएंट कॉलोनियों को नियमित करने का भी मुद्दा उठाया गया, जिन्हें हाल ही में नियमित की गई 1511 कॉलोनियों में शामिल नहीं किया गया था।
व्यापारिक गतिविधियों को लेकर भी सांसदों ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों पर 70 प्रतिशत से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं, उन्हें कमर्शियल घोषित किया जाए। साथ ही, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में वर्षों से सील पड़ी करीब 13 हजार दुकानों को डी-सील करने की भी मांग की गई, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके। मुलाकात के दौरान सांसदों ने मास्टर प्लान को शीघ्र नोटिफाई करने, जीडीए और लैंड पूलिंग पॉलिसी को लागू करने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि इन कदमों से अव्यवस्थित विकास पर रोक लगेगी और दिल्ली को स्लम बनने से बचाया जा सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों के मुद्दों को उठाते हुए सांसदों ने कहा कि शहरीकृत गांवों की ग्रामसभा की जमीन, जो दिल्ली विकास प्राधिकरण को ट्रांसफर हो चुकी है, उसका उपयोग केवल स्थानीय निवासियों को सुविधाएं देने के लिए किया जाए। इसके अलावा लालडोरा की विस्तारित आबादी को नियमित करने की मांग भी रखी गई।