चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल बाघिन सिद्धि और बेटी बाघिन धात्री की जोड़ी वन्यजीवों के लिए मिसाल है। धात्री अपनी मां पर हमेशा कुर्बान रहती है। वहीं, सिद्धि अपनी बेटी से दूर जाने पर विचलित हो जाती है। दोनों एक-दूसरे के बिना खाना तक नहीं खाते हैं। धात्री अपनी मां के लिए कई बार मांस का टुकड़ा बाड़े में छिपा देती है। जब सिद्धि को भूख लगती है, तो वह मांस का टुकड़ा उन्हें खाने के लिए लाकर देती है। इसे देख बाघिन मां खूब खुश होती है।
इसके बाद धात्री मां से दुलार पाती है। यह दोनों बाड़े में आते ही अठखेलियां करती हैं। इनकी चहल-कदमी को देखकर दर्शक भी रोमांचित हो जाते हैं। यही नहीं जब भी बाघिन मां सिद्धि की तबीयत खराब होती है, तो धात्री हर वक्त मां के लिए परेशान नजर आती है। वहीं, धात्री को जब कभी खेलते वक्त चोट या खरोंच आती है, तो सिद्धि उसकी देखभाल में जुट जाती है। यह देख चिड़ियाघर के कर्मचारी भी भावुक हो जाते हैं।
उधर, चिड़ियाघर में रह रहीं दो मादा गैंडा भी मां-बेटी के रूप में ममता का परिचय हैं। 26 वर्षीय मादा गैंडा माहेश्वरी जल्द अपनी 18 वर्षीय बेटी अंजूहा का कुनबा बढ़ाने के लिए असम जाएगी। दोनों मां-बेटी लंबे समय से यहां रह रही हैं। दोनों एक-दूसरे का हमेशा ख्याल रखती हैं। माहेश्वरी अगर तालाब के अंदर देर तक चली जाती है, तो अंजूहा भी उसे ढूंढने निकल पड़ती है। असम से अंजूहा के लिए नर गैंडा दिल्ली लाया जाएगा।
एक ही समय पर खाने के लिए जाती हैं मां-बेटी
जब तक मादा गैंडा माहेश्वरी खाना नहीं खाती है, तब तक अंजूहा भी भोजन को मुंह तक नहीं लगाती है। दोनों मां-बेटी एक ही समय पर खाने के लिए जाती हैं। कई बार बेटी अंजूहा भूखी न रह जाए, इसके लिए माहेश्वरी अपने हिस्से का भोजन बाद के लिए बचा लेती है। रात को जब तक माहेश्वरी सोती नहीं है, तब तक अंजूहा भी मां के साथ उठी रहती है। चिड़ियाघर प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से इंसानों में माता-पिता के लिए भावना होती है, वैसे ही कुछ हद तक वन्य जीवों के अंदर भी यह चीज देखी जाती है। असम से नर गैंडा लाने की तैयारी की जा रही है। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले कुछ महीनों में नर गैंडा यहां दर्शकों को देखने के लिए मिलेगा। इसके अलावा विदेश के चिड़ियाघरों से भी जानवरों की अदला-बदली को लेकर बातचीत चल रही है। यहीं नहीं, इससे गैंडों का कुनबा भी बढ़ेगा।