सास-बहू की लड़ाई के किस्से खूब सुने जाते हैं लेकिन ऐसी सास और बहू की कहानी बहुत कम सुनने को मिलती है। जिसमें सभी चिकित्सीय जांच-पड़ताल के बाद जब मां ने बेटी को किडनी देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि किडनी देने के बाद मैं कैसे बचूंगी?
ऐन टाइम पर मां के मुकर जाने के बाद सास आगे आई और उसने अपनी किडनी देकर बहू की जान बचाई। सर्जरी के बाद सास-बहू दोनों स्वस्थ हैं।
जानकारी के मुताबिक उत्तम नगर निवासी कविता की किडनी खराब हो गई थी और किडनी प्रत्यारोपित करने का निर्णय लिया गया।
एक सास ऐसी भी बहू के लिए आई आगे
कविता की मां अपनी बेटी को किडनी देने के लिए तैयार थी। किडनी लेने से पहले सभी चिकित्सीय जांच-पड़ताल पूरी कर ली गई। जब किडनी निकालने के लिए सर्जरी की जानी थी तब कविता की बुलंदशहर से आई मां डर गईं और किडनी देने से मना कर दिया।
प्रत्यारोपण के ठीक पहले मुकरने से चिकित्सकों और कविता के लिए मुश्किल खड़ी हो गई। ऐसी परिस्थिति में कविता की 65 वर्षीय सास विमला सामने आईं और अपनी किडनी बहू को देने के लिए तैयार हो गईं।
इसके बाद चिकित्सकों ने विमला की किडनी लेने के पहले चिकित्सीय जांच-पड़ताल शुरू की।
फिल्मी है इनकी कहानी
इसके बाद 23 जून को सफल सर्जरी कर कविता को किडनी प्रत्यारोपित की गई। अब दोनों स्वस्थ हैं और दोनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
बीएलके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. सुनील प्रकाश ने कहा कि कहानी फिल्मी लगती है लेकिन इस तरह की पहल से सास-बहू के रिश्ते को और मजबूती मिलती है।
अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि इस अस्पताल में यह पहला मामला है जब किसी सास ने अपनी बहू को किडनी दान दी हो। सास विमला ने कहा कि कविता मेरी बहू नहीं बेटी है।