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ज्यादातर तालाब-झीलें अतिक्रमण मुक्त: एमसीडी

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नियमित मॉनिटरिंग का भी किया दावा, एनजीटी को 21 जल निकायों की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट सौंपी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने राजधानी के जल निकायों और वेटलैंड के संरक्षण से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष दो महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश किए हैं। निगम ने एक ओर वजीराबाद नमभूमि की मौजूदा स्थिति दर्शाने वाली नई तस्वीरें और जीपीएस लोकेशन रिकॉर्ड में शामिल करने का अनुरोध किया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली के 21 तालाबों और झीलों की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दिल्ली वेटलैंड अथॉरिटी को सौंप दी है। रिपोर्ट में ज्यादातर जल निकायों को अतिक्रमण मुक्त बताते हुए उनकी नियमित निगरानी का दावा किया गया है।
वजीराबाद नमभूमि मामले में एनजीटी ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। आरोप था कि वजीराबाद के पास स्थित नमभूमि क्षेत्र में कचरा डंप किया जा रहा है। मामले में एमसीडी की ओर से भलस्वा लैंडफिल के कार्यकारी अभियंता (सिविल) अतहर मुस्तफा ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि गत 30 जून को झरोदा माजरा, बुराड़ी स्थित संबंधित स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ली गई तस्वीरों के साथ जीपीएस लोकेशन भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि स्थल की सही पहचान सुनिश्चित हो सके। निगम ने एनजीटी से इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड का हिस्सा बनाने का आग्रह किया है।
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एनजीटी के निर्देश पर तैयार जल निकायों की रिपोर्ट में गाजीपुर, मंडावली फजलपुर, वेलकम झील, रोशनआरा बाग झील, समयपुर, आया नगर, नांगलोई जाट, नजफगढ़, पालम, पोचनपुर और बागडोला सहित 21 जल निकायों की स्थिति का आकलन किया गया है। एमसीडी के अनुसार अधिकांश जल निकाय अतिक्रमण मुक्त हैं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। हालांकि, जोनापुर (खोली) स्थित जल निकाय वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण एमसीडी के नियंत्रण में नहीं है।
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दावा : पानी की गुणवत्ता सामान्य या बेहतर पाई गई
रिपोर्ट के मुताबिक वेलकम झील, रोशनआरा बाग झील, आया नगर, नांगलोई जाट, नजफगढ़ और बागडोला में पानी की गुणवत्ता सामान्य या बेहतर पाई गई है। वहीं, गाजीपुर, मंडावली, पालम और पोचनपुर के कुछ जल निकाय मौसमी होने के कारण फिलहाल सूखे हैं। एमसीडी ने दावा किया है कि अधिकांश जल निकायों में बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह नहीं हो रहा है। कई स्थानों पर सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) संचालित हैं, जबकि झीलों और तालाबों की सुरक्षा के लिए चारदीवारी समेत अन्य संरक्षण उपाय किए गए हैं। निगम का कहना है कि जल निकायों और वेटलैंड के संरक्षण के लिए नियमित निगरानी और आवश्यक कार्रवाई जारी है।
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