दिल्ली में ज्यादातर बाल श्रमिक अवैध फैक्टरियों में काम करते हैं। उनसे तय समय से ज्यादा वक्त काम कराया जाता है। यह बात बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) की स्टडी में सामने आई है। अनाज मंडी अग्निकांड के मद्देनजर मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर जंतर-मंतर पर जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बीबीए ने वर्ष 2005 से लेकर अब 8918 बाल श्रमिकों को मुक्त कराया है। इनमें करीब 94 फीसदी अवैध फैक्टरियों में काम कर रहे थे।
दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ मिलकर बीबीए ने मंगलवार को दिल्ली कैंट और नारायणा इलाके से नौ बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। इनमें से ज्यादातर किशोर दिल्ली कैंट व नारायणा बाजार में ढाबों और दुपहिया वाहन मैकेनिकों के यहां काम कर रहे थे। गौरतलब है कि अनाज मंडी अग्निकांड में कई किशोरों की मौत हुई है।
बीबीए वर्ष 2019 में अब तक 2220 बाल श्रमिकों को मुक्त करा चुकी है। इनकी उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है। ये बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व नेपाल के रहने वाले हैं। इन्हें बिहार के मुजफ्फरपुर, सहरसा, दरभंगा आदि से मानव तस्करी कर लाया गया था।
मुक्त कराए गए किशोर करीब दो वर्ष से काम कर रहे थे। इनसे 10 से 14 घंटे काम कराया जाता था। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी में पेश कर इन्हें बीबीए के मुक्त आश्रम में भेज दिया गया है। आरोपी ढाबा मालिकों व दुकानदारों के खिलाफ नारायणा और दिल्ली कैंट थाने में मामला दर्ज किया गया है।
बीबीए की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीआईआईडीसी ने अगस्त-2018 में एक सर्वे किया था। इसके अनुसार, 51837 फैक्टरियां आवासीय इलाकों में अवैध रूप से चल रही थीं।
इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सलाह दी गई थी। स्टडी के मुताबिक, ये हजारों किशोर अवैध फैक्टरियों में काम करते हैं। इन्हें पुलिस, श्रम विभाग व अन्य एजेंसियों का संरक्षण है। बीबीए के प्रवक्ता संपूर्णा बेहरा के अनुसार, ज्यादा किशोरों को तंग, सुस्त व भीड़भाड़ वाली जगहों पर काम के लिए धकेल दिया जाता है। अनाज मंडी आवासीय क्षेत्र है।
यहां चमड़े व खिलौनों की पैकिंग आदि की यूनिटें चलती हैं। ऐसी जगहों पर सुरक्षा व बिल्डिंग से बाहर निकलने संबंधी नियमों का पालन नहीं किया जाता। बीबीए ने छह सूत्रीय प्लान जारी कर उसे तुरंत लागू करने की मांग की।