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दुनिया में दूसरे नंबर पर थी मोजर बेयर कंपनी, हजारों लोगों की नौकरी खतरे में

Sun, 23 Sep 2018 01:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Moser Baer
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मोजर बेयर इंडिया लिमिटेड सीडी और डीवीडी के उत्पादन में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी थी। डीवीडी, सीडी के अलावा यहां मोबाइल के मेमोरी कार्ड और सोलर प्लांट का भी उत्पादन होता था। यहीं नहीं, जिले की सबसे बड़ी कंपनियों में यह शामिल थी।
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एक समय कंपनी में 11 हजार स्थायी और चार हजार अस्थायी कर्मचारी थे। धीरे-धीरे कंपनी की स्थिति बिगड़ती चली गई। मोजर बेयर इंडिया की फेस-2 यूनिट वर्ष 1999 और सूरजपुर की यूनिट वर्ष 2002 में शुरू हुई थी। वर्ष 2006 तक कंपनी में उत्पादन पूरी तरह शुरू हो गया था।

कंपनी 15 हजार लोगों को रोजगार दे रही थी। इनके अलावा, हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ था। इसकी 50 से अधिक वेंडर कंपनियां थीं, जिनमें हजारों लोग काम करते हैं।
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कंपनी के बंद होने से उनका रोजगार भी खतरे में आ गया है। कई कंपनियां पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अब बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। मोजर बेयर के बंद होने से जिले के औद्योगिक विकास को बड़ा झटका लगा है।

 

‘झूठ बोलकर निकाल दिया था बाहर’

कंपनी को पिछले साल तीन नवंबर को बंद कर दिया गया था। इसके बाद यहां काम करने वाले 2280 कर्मचारी सड़क पर आ गए। कर्मचारियों ने बताया कि प्रबंधन ने झूठ बोलकर कंपनी से बाहर निकाला।

एक नवंबर को कंपनी ने जनरेटर प्लांट में काम होने की कारण कंपनी दो दिन बंद रहने का नोटिस दिया। कर्मचारी तीन नवंबर को कंपनी पहुंचे तो गेट पर ताला लगा हुआ था।

वर्कर यूनियन ने लगाए गंभीर आरोप
मोजर बेयर वर्कर यूनियन ने एनसीएलटी के फैसले को सुप्रीम कोर्ट और आर्थिक अपराध शाखा में चुनौती देने का फैसला लिया है। यूनियन ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

यूनियन का आरोप है कि कंपनी मालिक ने राजनीतिक संबंधों का फायदा लेकर बैंकों से बड़ा लोन ले लिया और सरकार के सहयोग से चार-पांच बड़ी कंपनियां खोलीं। मोजर बेयर कंपनी में सबसे अधिक पैसा लगाया गया।
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अब जब लोन वापस देने की बारी आई है तो कंपनी को दिवालिया घोषित करा लिया है। यूनियन का कहना है कि कंपनी ने 4356 करोड़ का लोन माफ करा लिया है। वहीं प्लांट की कीमत 337 करोड़ लगाई गई है।

कर्मचारी सतेंद्र नागर ने आरोप लगाया कि कंपनी 30 हजार करोड़ की बन चुकी थी और ठीक काम कर रही थी। बाद में इसका पैसा दूसरी कंपनी में लगा दिया गया।

कैसे चलेंगे 2280 कर्मचारियों के परिवार
पिछले साल जिस समय कंपनी को बंद किया गया था, तब 2280 कर्मचारी थे। इन सभी के सामने नौकरी का सवाल खड़ा हो गया है। पिछले 12 माह से कर्मचारी वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन नहीं मिला।

इस दौरान कई कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। कई ने प्रदर्शन कर आत्मदाह करने की कोशिश की है। अब कर्मचारियों के सामने परिवार का पालन-पोषण करने की समस्या है।
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