इनमें से करीब 10 फीसदी मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें कुछ ज्यादा गंभीर थे जिन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। वहीं कुछ मरीजों की हाथों की उंगलियां तक पटाखे से उड़ गईं। जबकि कई को गंभीर रूप से चोट लगी। डॉक्टरों की माने तो इस बार पटाखे और दीये से जलने वाले वालों की संख्या काफी ज्यादा है। इसके अलावा सजावट के दौरान बिजली का करंट व अन्य से भी घायल होकर लोग अस्पताल पहुंचे हैं। दिल्ली में पिछले साल भी 216 से अधिक लोग घायल होकर अस्पताल पहुंचे थे।
एम्स में 31 मरीज पहुंचे
एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 11 और 12 नवंबर को कुल 31 मरीज घायल होकर अस्पताल पहुंचे। इनमें से दीये से जलने वाले आठ मरीज थे। इनमें से पांच को आईसीयू में रखा गया। जबकि तीन को ओपीडी में देखने के बाद छुट्टी दी गई। वहीं पटाखे से 21 मरीज घायल हुए। इसमें से छह मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। एक को वार्ड में और 14 मरीज को सामान्य ओपीडी में देखने के बाद छुट्टी दे दी गई। वहीं बिजली का करंट लगने से घायल होकर दो मरीज पहुंचे और दोनों को आईसीयू में भर्ती किया गया।
सफदरजंग अस्पताल में 100 मरीज पहुंचे
सफदरजंग अस्पताल में घायल होकर 100 मरीज पहुंचे। इनमें 86 मरीज कम घायल होकर और 14 मरीज गंभीर रूप से घायल होकर पहुंचे। इनमें सबसे ज्यादा पुरुष 78 और महिला 22 रही। इनमें 12 साल से कम 21 मरीज और 12 साल से अधिक 77 रहे। इनमें दिया से जलने वाले 18 और पटाखे के 82 मरीज हैं। इनमें दिल्ली से 93 और दिल्ली के बाहर से 7 मरीज हैं।
डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 30 मरीज पहुंचे
वहीं डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में करीब 30 मरीज पहुंचे। इनमें करीब 40 फीसदी बच्चे हैं। इनमें से अधिकतर मरीजों को सामान्य चिकित्सा के बाद छुट्टी दे दी गई। जबकि तीन बच्चों को भर्ती किया गया। बताया जा रहा है कि इन तीन बच्चों के हाथ में पटाखा फट गया था। इस बच्चों की उम्र 21, 17 और 7 साल है। ऐसा बताया जा रहा है इनकी अगुंली भी उड़ गई, हालांकि उपचार पूरा होने के बाद पता चलेगा कि कुल कितना नुकसान हुआ है।