कहां-कितने टेस्टिंग सेंटर
कोरोना को कंट्रोल करने के लिए दिल्ली सरकार ने ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग की रणनीति अपनाई है। इसके मद्देनजर दिल्ली के सभी जिलों में 30 से 40 कोरोना सैंपल लेने के लिए टेस्टिंग सेंटर बनाये गये हैं। सरकार के इन सेंटरों के आलावा प्राइवेट अस्पताल अपने स्तर पर भी टेस्टिंग कर रहे हैं। इस प्रकार किसी भी व्यक्ति को कोरोना होने की आशंका होने पर उसका कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।
रेल यात्रा से लेकर हवाई यात्रा करने के लिए भी कोरोना निगेटिव रिपोर्ट होना अनिवार्य कर दिया गया है। कुंभ मेले में जाने के लिए भी हरिद्वार जिला प्रशासन ने कोरोना निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दी है। इन सभी प्रतिबंधों का असर हुआ है कि राजधानी में भारी संख्या में कोरोना टेस्ट किये जा रहे हैं। लेकिन समय पर रिपोर्ट न मिल पाने के कारण लोगों को भारी असुविधा का भी सामना करना पड़ रहा है।
कितने मिले पॉजिटिव
दिल्ली सरकार की जानकारी के अनुसार 12 अप्रैल को राजधानी में 92,397 कोरोना सैंपल लिए गये थे, जिनमें से 12.44 फीसदी लोगों को पॉजिटिव पाया गया था। 11 अप्रैल को एक लाख 14 हजार 288 कोरोना टेस्ट किये गये जिनमें 9.43 फीसदी लोग पॉजिटिव मिले। इसी प्रकार 10 अप्रैल को 77,374 टेस्ट किये गये थे जिनमें 10.21 फीसदी लोगों को पॉजिटिव पाया गया था।
(कोरोना रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए जाने की दर सरकार द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर साझा की गई है।)
कितनी लैब्स
राजधानी में भारी संख्या में टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन इन टेस्ट्स का परीक्षण करने वाली वाले लैब्स की संख्या बेहद सीमित है। राम मनोहर लोहिया, लेडी हार्डिंग अस्पताल और सफदरजंग अस्पताल जैसे कुछ चुनिंदा अस्पतालों में ही कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट देने की क्षमता वाली लैब्स हैं। सरकार ने डॉ. लाल पैथ लैब्स जैसी कुछ प्राइवेट लैब्स को भी कोरोना टेस्ट्स की रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत कर रखा है। लेकिन भारी संख्या में टेस्ट आने के कारण यहां रिपोर्ट बनने में देरी हो रही है। कई मामलों में यह तीन से चार दिन दिन तक की देरी हो रही है।