दिल्ली परिवहन विभाग ने पहले से चल रहे ई-रिक्शा को मानकों के अनुरूप जांच में असमर्थता जताई है। विभाग का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई एजेंसी नहीं है जिससे जांच कराई जा सके।
विभाग ने केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन का जवाब दिया है कि वह अन्य प्रावधानों के लिए तैयार है। दिल्ली में फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद ई-रिक्शा पर पाबंदी लगी है।
दरअसल, केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ड्राफ्ट अधिसूचना में पुराने ई-रिक्शा के लिए एक एजेंसी से सैंपल टेस्ट के बाद पास करने की बात कही है। इसके लिए पंजीकृत ई-रिक्शा एसोसिएशन से सैंपल टेस्ट के लिए 30 नवंबर 2014 तक का समय दिया गया है।
इस दौरान एसोसिएशन अलग-अलग मॉडल के ई-रिक्शा का सैंपल टेस्ट (एक कंपनी द्वारा निर्मित रिक्शों में से कोई भी एक) कराकर राज्य परिवहन विभाग से उस मॉडल का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। इस तरह दिल्ली में कुल 18 ई-रिक्शा कंपनियां यानी 18 मॉडल के ई-रिक्शा सड़क पर चल रहे हैं।
अब उसी प्रावधान को परिवहन विभाग ने कहा है कि उनके पास ऐसे सैंपल टेस्ट के लिए ढांचा है। टेस्टिंग के लिए कोई एजेंसी भी नहीं है। ऐसे में हम सैंपल टेस्ट नहीं करा सकते जिसके आधार पर पुराने ई-रिक्शा को पास करने की बात कही है। परिवहन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक दिल्ली में ऐसे वाहनों जांच के लिए कोई भी विशेषज्ञ कंपनी नहीं है। ऐसे ज्यादातर एजेंसी, पुणे, अहमदाबाद समेत अन्य जगहों पर ही हैं।
क्या कहती है पूर्व की सैंपल रिपोर्ट
दिल्ली परिवहन विभाग के कहने पर पहले से चल रहे ई-रिक्शा पर 2013 में टेरी ने एक सैंपल टेस्टिंग के आधार पर अध्ययन किया था। टेरी ने दिल्ली के 18 निर्माता कंपनियों के अलग-अलग मॉडल के 53 ई-रिक्शा का अध्ययन किया था। उस रिपोर्ट में टेरी ने कहा था कि एक ही कंपनी के अलग-अलग ई-रिक्शा के मॉडल में काफी अंतर है। किसी भी कंपनी का कोई तय मानक नहीं है जिसके आधार पर ई-रिक्शा बनता है।