पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट खंडपीठ की मांग को लेकर उपजे विवाद ने टीम मोदी की सामंजस्यता पर सवाल खड़ा कर दिया है। दो केंद्रीय मंत्रियों के बयानों से टकराव की स्थिति बन गई है।
मेरठ में खंडपीठ की मांग को लेकर विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह के बयान का केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने खंडन कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह असत्य और तथ्यहीन बताया है।
बता दें कि बुधवार को दिल्ली में मेरठ और गाजियाबाद के वकीलों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों से जनरल वीके सिंह ने कहा था कि आगरा के सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया खंडपीठ पर अपने यहां का दावा छोड़ने को तैयार हो गए हैं।
इस पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया के प्रतिनिधि अनिल चौधरी और प्रवक्ता शरद चौहान ने कहा कि पश्चिमी उप्र में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनरल वीके सिंह ने जो बयान दिया है, उस संबंध में प्रो. कठेरिया से उनकी कोई बात नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रो. कठेरिया का कहना है कि जनरल वीके सिंह का बयान पूरी तरह से असत्य व तथ्यहीन है।
प्रो. कठेरिया आज भी पश्चिमी उप्र में खंडपीठ स्थापित कराने के लिए प्रयासरत हैं। वह पिछले छह सालों से आंदोलन करते रहे हैं। उनका कहना है कि वह अपनी मांग पर कायम हैं, जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट तत्काल प्रभाव से लागू की जाए।
इस संबंध में प्रो. कठेरिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर बात रख चुके हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री बनने के बाद पहली बार आगरा आए प्रो. कठेरिया ने आगरा में हाईकोर्ट खंडपीठ कराने के लिए केंद्र में पैरवी पर जोर दिया था। इसको लेकर मेरठ के वकीलों ने हंगामा कर दिया था।