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'मोदी मॉडल' के जाल में फंसा गैंग, पकड़े गए शातिर

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मोदी के मॉडल की चर्चा दुनिया में यूं ही नहीं होती। इसका एक बड़ा उदाहरण शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिला। दिल्ली में अपराधियों के एक शातिर गैंग को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने मोदी के मॉडल का सहारा लिया और उन्हें एक बड़ी सफलता हाथ लगी।
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असल में दिल्ली के दरीवा कलां में सीसीटीवी नेटवर्क बनाया गया जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप पर विकसित किया गया था। इसी नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली के चांदनी चौक के नजदीक मुंबई के बादशाह गैंग के छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

दरीवा कलां में बनाया गया ये नेटवर्क बिजनेस एरिया वॉच स्कीम (BAWS) के तहत बनाया गया है। अपराध को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया ये नेटवर्क मोदी के सेफ सिटी सूरत मॉडल पर बेस्ड है। जिस बादशाह गैंग को इस नेटवर्क से पकड़ा गया है उसने सात नवंबर को दिल्ली के भीड़ भरे इलाके चांदनी चौक में 17 लाख की चोरी को अंजाम दिया था।
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क्या है मोदी मोदी का सूरत मॉडल

इस मामले का खुलासा करते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर भीमसेन बस्सी ने बताया कि सात नबंवर को दिल्ली के एक ज्वैलर को बादशाह गैंग के एक सदस्य द्वारा परेशान किया गया। इसी बीच गैंग का दूसरा आदमी ज्वैलर से बैग छीनकर फरार हो गया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ शुरु की। वह पुलिस को यह कहकर गुमराह करता रहा कि वो चांदनी चौक में खरीदारी करने गया था। हालांकि पुलिस की कड़ाई के बाद उसने वारदात में शामिल होने की बात कुबूल कर ली। और पूरे मामले का खुलासा किया।

देश में पहली बार लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से सूरत में नरेन्द्र मोदी के द्वारा सेफ सिटी सूरत मॉडल लॉन्च किया गया था। जनवरी 2013 में बने इस मॉडल पर 10.50 करोड़ रुपये खर्च किये गये थे।

इस मॉडल की खास बात ये है कि (PPP)पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप र बेस्ड था। मोदी को उम्मीद थी कि मानव और तकनीकि को बेहतर रुप से इस्तेमाल करने से बेहतर सुरक्षा मुहैया कराई जा सकती है।
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