तालीम के लिहाज से पिछड़े मेवात में साइंस की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। चुनावी आचार संहिता खत्म होने के बाद इस पर काम शुरू किया जाएगा।
मेवात के लिए इस पायलट प्रोजेक्ट की जिम्मेवारी राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को दिया गया है। अगर प्रोजेक्ट सफल होता है तो शिक्षा निदेशालय अन्य जिलों में भी लागू करेगा।
हाल ही में तमाम जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों के मार्फत स्कूल के अनुसार सर्वे कराया गया था। कई ऐसे स्कूल हैं, जहां बुनियादी सुविधा से छात्र महरूम है। कुछ स्कूलों में साइंस की पढ़ाई होती है, लेकिन वहां पर प्रयोगशाला नहीं है। इसे देखते हुए निदेशालय ने बतौर पायलट प्रोजेक्ट मोबाइल लैब शुरू करने की तैयारी की है। इस बाबत अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन के साथ गठजोड़ किया गया है।
मोबाइल लैब के जरिए बच्चों को प्रैक्टिकल करने का मौका दिया जाएगा। इसमें छठीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को लाभ मिलेगा। इसमें स्कूल के नजदीक मोबाइल प्रयोगशाला रहेगी और आसपास के छात्रों को अगस्त्य इंटरनेशनल फाउंडेशन की ओर से वहां लाया जाएगा। मोबाइल लैब में साइंस किट होगी। इसकी मदद से वो प्रैक्टिकल कर सकेंगे। साइंस सेंटर, ‘हब और स्पोक’ मॉडल के जरिए छात्रों को साइंस के सिद्धांतों की जानकारी दी जाएगी।
एससीईआरटी की डायरेक्टर स्नेहलता ने कहा कि मेवात में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए विभाग काम कर रहा है। वित्तीय वर्ष खत्म होने और चुनाव के बाद इस पर काम शुरू किया जाएगा। एससीईआरटी से विषय विशेषज्ञों (विज्ञान) का एक दल शैक्षणिक जानकारी और कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए काम कर रहा है।