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5वें फ्लोर से आएगी मौत, उस नादान को इसका इल्म न था

Sat, 01 Feb 2014 09:11 AM IST
अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा के गिझोड़ गांव में शुक्रवार को हुए हादसे में 12 साल की बच्ची पर इमारत की रेलिंग मौत बनकर गिरी।
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एक अपार्टमेंट की पांचवीं मंजिल पर रेलिंग लगाने का काम चल रहा था। इसी दौरान सड़क से गुजर रही बच्ची पर रेलिंग गिर पड़ी। हादसे में बच्ची की मौत हो गई। जिसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा, लेकिन पुलिस ने ग्रामीणों को शांत कर हालात संभाल लिए।

हादसा सेक्टर-53 से सटे चौहान मार्केट के पास करीब 11.30 बजे हुआ। बेनी गंज, हरदोई निवासी रामचंदर की 12 साल की बेटी ललिता स्कूल से लौट रही थी, इसी दौरान उस पर रेलिंग गिरी। गंभीर रूप से घायल ललिता को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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पिता रामचंदर सब्जी का ठेला लगाकर परिवार चलाता है। इस हादसे के बाद लोगों का गुस्सा देखकर ठेकेदार और मजदूर मौके से भाग गए। हालात देखते हुए मौके पर कई थानों की पुलिस बुला ली गई थी।

सेक्टर-24 पुलिस को ग्रामीणों ने दो मजदूर सौंपे, जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने जमीन मालिक ज्ञानी पंडित, गाजियाबाद निवासी ठेकेदार नरेश कोहली, परमानंद व मजदूर कांधीलाल और जोंगिदर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।

नहीं रखा सुरक्षा मानकों का ध्यान
पांच मंजिला अपार्टमेंट के निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की जमकर धज्जियां उड़ रही थीं। यहां मजदूर सेफ्टी उपकरण का इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। जाल भी नहीं लगाया गया था, जिससे निर्माण सामग्री को सड़क या किसी के घर पर गिरने से रोका जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण सामग्री भी घटिया है, जो आगे बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

शिकायत की थी, आरटीआई भी दाखिल
अपार्टमेंट के बेसमेंट की खुदाई के दौरान ही आसपास के लोगों को दिक्कतें महसूस हुईं। उन्होंने पुलिस से लेकर ग्राम समाज अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। निर्माण कार्य के दौरान अक्सर सड़क से गुजरने वालों को चोट लगती थी। ग्रामीण सुरेश कुमार ने बताया कि वह लगातार पुलिस से इस निर्माण की शिकायत कर रहे थे। पांच जनवरी को उन्होंने इस संबंध में आरटीआई भी दाखिल की। जिसका जवाब अभी तक नहीं आया है।
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पुलिस भी आरोपों के घेरे में
ग्रामीणों ने पुलिस पर भी बिल्डरों से मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि बिल्डरों को कोई परेशानी न हो इसके लिए अक्सर पीसीआर की गाड़ी वहां रुकती थी। ग्रामीण अगर शिकायत करते थे, तो बिल्डर और ठेकेदार फर्जी मामले दर्ज कराने की धमकी देते थे।
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