फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुधार गृह की जगह सलाखों के पीछे पहुंच गए हजारों बच्चे

Fri, 02 May 2014 07:15 PM IST
प्रियंवदा सहाय/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
तिहाड़ समेत देश के तमाम जेलों में हजारों नाबालिग बच्चे बंद हैं। बेशक सरकार ने 18 साल से कम उम्र के अपराधियों की जगह सुधार गृह में तय की है, लेकिन सही उम्र की जानकारी नहीं होने और आसानी से छूटने की लालच में ये सुधार गृह की जगह सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।
विज्ञापन


राष्ट्रीय बाल आयोग ने कुबूल किया है कि तिहाड़ समेत देश के तमाम जेलों में हजारों नाबालिग बच्चे बंद हैं। अकेले दिल्ली में 2600 बच्चों के जेलों में बंद होने की आशंका जताई गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट में पेश हलफनामे में बाल आयोग ने तिहाड़ में वर्ष 2012 से 2014 के बीच 198 नाबालिग बच्चों के बंद होने की बात कही है। इस मामले की अगली सुनवाई इसी माह होनी है।
विज्ञापन


आयोग का कहना है कि दूसरे राज्यों में भी बड़ी संख्या में बाल अपराधी जेलों में बंद हैं। आयोग इन बच्चों को आधार नंबर देकर आयु प्रमाण देना चाहता है। इस संदर्भ में यूआईडी प्राधिकरण और राज्य सरकारें तैयार हैं।

हालांकि देशभर की जेलों में बंद नाबालिगों की संख्या का सही आंकलन नहीं हो सका है, लेकिन उनकी संख्या हजारों में हो सकती है। बाल आयोग की चेयरपर्सन कुशल सिंह ने बताया कि ऐसे बच्चों को आधार नंबर उपलब्ध कराने के लिए यूआईडी प्राधिक रण सहमत हो गया है।

उन्होंने कहा कि खौफनाक अपराधियों के साथ जेलों में बंद नाबालिगों के संबंध में बाल आयोग ने सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी है, लेकिन ज्यादातर राज्यों ने इसका जवाब नहीं दिया है। अब इस मामले में मानवाधिकार आयोग की मदद ली जा रही है।

कुशल सिंह ने बताया कि कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं जिनमें जल्द जमानत दिलाने के लिए वकील की ओर से नाबालिगों की अधिक उम्र दर्ज कराने की सलाह दी गई थी। साथ ही पुलिस के असंवेदनशील और गैरजिम्मेदराना रवैये के कारण भी तिहाड़ में किशोर सड़ रहे हैं।

पिछले साल जून में सामने आई थी सच्चाई
कुशल सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर पिछले साल जून में आयोग की एक टीम ने तिहाड़ का दौरा करने पर यह पाया कि जेल में सजा काट रहे सैकड़ों ऐसे कैदी हैं जो देखने में 18 वर्ष से कम आयु के लगते हैं, लेकिन उनकी उम्र 18 से ऊपर दर्ज है। कैदियों की वास्तविक उम्र जानने के लिए छानबीन शुरू की गई तो उन्हें नाबालिग पाया गया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें