केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडे़ेकर ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली-एनसीआर में 15 अक्तूबर से जब ठंड होती है और पंजाब, हरियाणा में पराली जलाई जाती है तब प्रदूषण की स्थिति बिगड़ती है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के साथ एक अक्तूबर को मंत्री स्तर की वर्चुअल बैठक होगी।
पराली के मुद्दे पर केजरीवाल ने प्रकाश जावड़ेकर को लिखा था पत्र
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात का समय न मिल पाने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सर्दियों में दिल्ली को पराली के धुएं से बचाने के लिए उनको पत्र लिखा था। शनिवार को भेजे गए पत्र में केजरीवाल ने पराली के निपटारे के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा की नई तकनीक का जिक्र किया था। साथ ही अपील की है कि केंद्र सरकार दिल्ली के पड़ोसी राज्यों को इस तकनीक के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल के लिए प्रेरित करे।
उधर, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार शाम बताया कि उनकी फोन पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बात हो गई। जावड़ेकर ने ट्वीट किया कि उन्होंने केजरीवाल को बताया कि संबंधित राज्यों के साथ इस बारे में एक बैठक होनी है। केंद्र ने अभी तक वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में बहुत से कदम उठाए हैं। इसका नतीजा दिल्ली में प्रदूषण स्तर में कमी के तौर पर सामने आया है।
इससे पहले गुरुवार को संस्थान में जाकर तकनीक देखने अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात करने की बात कही थी। इसके लिए दिल्ली सरकार की तरफ से समय भी मांगा गया था। लेकिन मुलाकात संभव नहीं हो सकी। केजरीवाल ने अपने पत्र में इसका जिक्र किया था। साथ ही याद दिलाया है कि वह पराली के धुएं से दिल्ली को होने वाली परेशानी के मसले में मुलाकात करना चाहते थे।
अरविंद केजरीवाल ने पूसा के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की तकनीक का जिक्र करते हुए लिखा कि इसमें बनाए गए केमिकल के छिड़काव से पराली खेत में ही गलकर खाद बन जाती है। इससे दोहरा फायदा मिलेगा। एक तरफ पराली न जलाने से वायु प्रदूषण नहीं होगा और खेती की उर्वरता खत्म नहीं होगी। वहीं, पराली जैविक खाद का काम करेगी। केजरीवाल का मानना है कि यह पराली के निपटान का बेहतर तरीका है।