फरीदाबाद में आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो बनारस के एक गांव जयापुर को गोद लेकर वहां पहुंच भी गए, लेकिन उनके करीबी मंत्रियों में गिने जाने वाले यहां के सांसद व केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर अब तक इसका फैसला तक नहीं कर सके हैं।
यह हाल तब है जबकि मोदी का निर्देश मिले 85 दिन बीत चुके हैं, और इनका क्षेत्र राजधानी से लगा हुआ है। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से सभी सांसदों को अपने क्षेत्र से एक गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए गोद लेने की अपील की थी।
लेकिन गुर्जर ने अभी तक इस पर विचार ही नहीं किया। ये हरियाणा प्रदेश के उन सांसदों में एक हैं जिन्होंने रिकार्ड 4 लाख से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है।
क्षेत्र की जनता ने उन्हें मोदी के नाम पर पलकों पर बैठाया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब सरकार के मंत्री ही इस तरह की लापरवाही करने पर उतारू हैं तो अन्य सांसदों की बात ही और है।
फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र की बात करें तो यहां गांवों की कुल संख्या 433 है जिनमें फरीदाबाद जिले में 148 और पलवल में 285 हैं। पलवल में कई गांव ऐसे हैं जहां आज भी आसानी से पह़ुंच पाना मुश्किल है।
जनसुविधाओं की बात तो दूर की हैं। फरीदाबाद जिले की बात करें तो वर्ष 2009 में दो गांव, वर्ष 2010 में 5 और 2011 में 3 गांवों को निर्मल ग्राम पुरस्कार के सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2012-13 के लिए निर्मल ग्राम पुरस्कार के लिए 30 गांवों को चिन्हित किया जा चुका है।
ये हैं आदर्श ग्राम का उदेश्य
दरअसल प्रधानमंत्री ने जिस आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसदों को एक गांव गोद लेने को कहा है उसमें सरकार की ओर से किसी बजट का प्रावधान नहीं किया है बल्कि सामाजिक सहयोग से आदर्श गांव बनाना है। जनसुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।