दिल्ली में पिछले एक महीने में पांच जगहों पर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश हो चुकी है। इस तरह की गतिविधियां दिल्ली में चुनाव होने की संभावना के साथ ही बढ़ी हैं। इसी बीच एक समुदाय विशेष के वोटों को अपने पाले में करने के लिए हर राजनीतिक दल उतावला दिखाई दे रहा है। इस कयास को यह खबर और भी पुष्ट करती है कि असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम भी दिल्ली में चुनाव लड़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार अपने भड़काउ बयान के लिए अक्सर चर्चाओं में रहने वाले असदउद्दीन ओवैसी की पार्टी अब दिल्ली में होने वाले विधान सभा चुनाव में भी हिस्सा ले सकती है। बता दें कि मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलीमीन (एमआईएम) ने हाल ही में हुए महाराष्ट्र चुनाव में भी अपनी उपस्थिती दर्ज कराई है। हालांकि इससे पहले पार्टी को महज हैदराबाद तक ही सीमित माना जाता था।
कयास है कि एमआईएम, जनता दल यूनाइटेड के पूर्व नेता शोएब इकबाल के संपर्क में है। एमआईएम नेता ओवैसी का कहना है कि दिल्ली में पार्टी को स्थापित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। इस बारे में शोएब इकबाल का कहना है कि एमआईएम और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही संपर्क में हैं लेकिन अभी तक कुछ भी फैसला नहीं हुआ है।
खास वर्ग के वोट के लिए की जा रही कवायद
हालांकि एमआईएम सूत्र इस बात से इंकार करते हैं कि वह वह शोएब इकबाल के संपर्क में हैं। उनका कहना है कि पार्टी दिल्ली में खुद को स्थापित करना चाहती है। इसके लिए वह किसी भरोसमंद उम्मीदवार की तलाश में है। इस बीच शोएब इकबाल जो एक मजबूत अल्पसंख्यक चेहरा माने जाते हैं ने स्पष्ट किया है कि इस बार वह जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे।
सूत्रों के मुताबिक एमआईएम देश भर में खुद को स्थापित करना चाहती है। फिलहाल उनका फोकस पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी और दिल्ली है। ओवैसी भले ही यह कहें कि दिल्ली के बारे में उनकी पार्टी ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है लेकिन वह इस बात से इंकार भी नहीं करते कि उनकी पार्टी दिल्ली में चुनाव नहीं लड़ेगी।
दिल्ली में पिछले चुनाव में ही कांग्रेस को काफी नुकसान हुआ था। आगामी विधान सभा चुनाव में भी पार्टी के प्रदर्शन को लेकर संदेह बरकरार है। माना जाता है कि दिल्ली में अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के खाते में जाते थे लेकिन पिछले चुनाव से इसमें विभाजन शुरु हो चुका है।
हर बार नई पार्टी से चुनाव लड़ते हैं
फिलहाल भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी दोनों ही इस वर्ग को अपने पाले में करने में तेजी से जुट गए हैं। भाजपा ने तो दिल्ली में उन छह इलाकों की पहचान भी कर ली है जहां मुस्लिम मतदाता बहुमत में हैं। इन इलाकों के लिए पार्टी ने अलग से रणनीति भी बनाना शुरु कर दिया है।
शोएब इकबाल का कहना है कि मुस्लिम वोटरों में यह विभाजन भाजपा के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है और आगामी विधान सभा चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत की ओर ले जा सकता है। हालांकि उन्होंने उन छह-सात सीटों के लिए अपने करीबी लोगों से बात करनी शुरु कर दी है जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक है।
शोएब इकबाल आम आदमी पार्टी पर निशान साधते हुए कहते हैं कि हाल ही में त्रिलोकपुरी दंगों में आप नेताओं ने तनाव कम करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। साथ ही उनका यह पोस्टर कि पीएम के लिए मोदी और सीएम के लिए केजरीवाल के नारे ने भी मुस्लिम मतदाताओं को नाराज ही किया है। यही कारण है कि हम दिल्ली में कांग्रेस के विकल्प के तौर पर नई दिशा में सोच रहे हैं जिससे कि हमारे वोट बंटे नहीं।
बता दें कि शोएब इकबाल 1993 से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं और जीत भी रहे हैं। हालांकि हर इलेक्शन में वह किसी नई पार्टी से चुनाव लड़ते हैं और जीतते है।
साभार: टीओआई