आम बजट को लेकर मध्यम वर्ग बहुत आस लगाए बैठा था। वेतनभोगी मध्य वर्गीय परिवार को इस बजट में इनकम टैक्स में छूट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया। यहां तक की सर्विस टैक्स बढ़ने से भी निराशा हाथ लगी।
सेक्टर-20 में निवासी रामपाल सिंह डीडीए में नौकरी करते हैं। महीने में 45,000 हजार रुपये कमाते हैं, लेकिन जब महीने के अंत में बचत की बात आती है तो हाथ कुछ नहीं लगता। इस बार बजट से उन्हें काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट उनकी उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया।
रामपाल ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। बेटा अनुज एमबीए कर चुका है और अब सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है। उसकी कोचिंग, किताबों और अन्य चीजों पर हर महीने 3000 रुपये का खर्च होता है, जबकि बड़ा बेटा अतुल रियल स्टेट की एक कंपनी में काम करता है।
उसकी सैलरी अभी बहुत कम है। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। उसके दो छोटे बच्चे हैं। उसकी पत्नी अमृता भी पढ़ाई कर रही है। बड़ा बेटा जो भी कमाता है, वो उसके बच्चों और पत्नी की पढ़ाई पर खर्च हो जाता है। घर खर्च में उसके वेतन का हिस्सा नहीं रहता है। उनके वेतन से ही पूरा परिवार चलता है।
किचन का बजट हर महीने करीब 11000 रुपये होता है। बच्चों की खाने-पीने की इच्छाओं को मार भी नहीं सकते। अभी दूध 50 रुपये किलो चल रहा है। अगर भैंस का दूध लेंगे तो वह और महंगा है। घर में लोग भी आते जाते रहते हैं। अगर सिर्फ महीने में दूध का खर्चा ही देखें तो 5000 से 6000 रुपये आता है। पत्नी की तबीयत भी खराब रहती है। हर महीने उसकी 2000 रुपये की दवाइयां आती हैं। ऐसे में महीने के अंत में मुश्किल से 1000 से 2000 रुपये की बचत हो पाती है।
सर्विस टैक्स बढ़ने से कैंसल करना पड़ सकता है टूर
रामपाल ने बताया कि इस बार पूरा परिवार गर्मियों की छुट्टियों में बाहर घूमने का प्लान बना रहा थे, लेकिन सर्विस टैक्स बढ़ने से टूर का खर्चा और बढ़ जाएगा। बाहर खाना-पीना भी बहुत महंगा हो जाएगा, इसलिए लग रहा है कि टूर कैंसल करना पड़ेगा।