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'मोदी, राजनाथ ने तबादला इंडस्ट्री के आगे घुटने टेके'

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दिल्ली में 15 मई से अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर जारी विवाद में आज केंद्र सरकार ने दखल देते हुए दिल्ली सरकार को नोटिफिकेशन भेजा है।
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केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी इस गजट में दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार ने अपना रूख साफ कर दिया है।

इस गजट में गृहमंत्रालय ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में केंद्र सरकार के अधीन आने वालों मामलों में नियुक्ति व हस्तांतरण का अंतिम अधिकार एलजी के पास है।

केंद्र सरकार के अधीन आने वाले पब्लिक ऑर्डर, पुलिस, जमीन और सेवा के क्षेत्र हैं। एलजी राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार समय-समय पर इन मामलों पर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।
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गजट में ये बात भी कही है कि इन चारों क्षेत्रों में यदि एलजी चाहें और जहां उन्हें उचित लगे तो वो सीएम से राय-सलाह कर सकते हैं।

गजट में साफ कहा गया है कि दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और उनकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

राज्यपाल और दिल्ली सरकार के रिश्तों को लेकर पहले भी ऐसा नोटिफिकेशन 24 सितंबर 1998 को जारी किया गया था।

सिसोदिया ने किया विवादास्पद ट्वीट

इस नोटिफिकेशन के जारी होने से कुछ समय पहले ही दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष‌ सिसोदिया ने कुछ ट्वीट कर ऐसे ही किसी गजट के आने की उम्मीद जताई थी।

उन्होंने अपनी ट्वीट में लिखा था कि, 'खबर है कि MHA के साथ बैठकर कुछ भ्रष्ट बाबू फतवा तैयार करा रहे हैं कि दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग LG के हाथ में ही हो।'

क्या MHA कुछ भ्रष्ट बाबुओं को बढ़ाने के लिए संविधान को ताक पर रखकर ऐसा नियम बनाएगा। जमीन, लॉ एंड ऑर्डर, पुलिस को छोड़कर सभी अधिकार संविधान ने दिल्ली सरकार को दे रखे हैं।

दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और उनसे काम लेना दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी है। इन चार मामलों में भी CM से बिना सलाह लिए नियुक्ति का अधिकार LG के पास नहीं है।

मनीष ने मोदी पर किया तीखा हमला

सिसोदिया ने आगे ट्वीट किया कि, 'दिल्ली में सीपी, सीएस, गृह सचिव, भूमि सचिव की नियुक्ति एलजी के हाथ में है लेकिन वो भी CM की सलाह लेकर।'

इन चार मामलों में भी CM से बिना सलाह लिए नियुक्ति का अधिकार LG के पास नहीं है। संविधान के अनुसार बाकी सभी ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास है।

अब देखना है कि संविधान जीतता है या कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं का गठजोड़। अगर ऐसा आदेश आता है तो साफ है कि मोदी जी और राजनाथ जी भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री के सामने घुटने टेक रहे हैं।
अगर ऐसा आदेश आता है तो साफ है कि मोदी जी और राजनाथ जी भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री के सामने घुटने टेक रहे हैं। 9/9— Manish Sisodia (@msisodia) May 22, 2015

'ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री है तो साबित करें सिसोदिया'

केंद्र सरकार का गजट आने के बाद भी सिसोदिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किए। जिसमें उन्होंने लिखा कि, 'नोटिफिकेशन से साफ है कि दिल्ली की ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री हमसे कितनी डरी हुई थी।'

उन्होंने कहा कि, 'इसके जरिए ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री को बचाने की कोशिश की जा रही है।' इसी तरह आप के कई और नेताओं ने भी गजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

संजय सिंह ने ट्वीट किया कि, 'मोदी सरकार का असली चेहरा सामने आया एक चुनी हुई सरकार को LG के डंडे से चलाना चाह रहे हैं मोदी लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है केंद्र सरकार।'

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के नेता अजय माकन ने कहा कि बीजेपी और आप जानबूझकर लोगों का ध्यान दूसरी तरफ ले जाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर सिसोदिया ये कहते हैं कि ट्रांसफर-पोस्टिंग ‌इंडस्ट्री चल रही है तो उन्हें इसे साबित करना चाहिए। वहीं इस गजट को लेकर केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस कुछ देर में होने की बात कही गई है।
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'ताकि दिल्ली सरकार को कोई भ्रम ना रहे'

आज जब वित्त मंत्री ‌केंद्र सरकार के एक साल पूरा होने पर सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे तो एक पत्रकार के सवाल के जवाब में उन्होंने दिल्ली के मुद्दे पर भी अपनी राय स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक मुद्दा है। उन्होंने गृहमंत्रालय द्वारा जारी सर्कुलर के बारे में पूछे गए सवाल पर ये जवाब दिया।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र द्वारा जारी किया गया गजट संवैधानिक दृष्टि से सरकार और एलजी के कार्यक्षेत्रों में स्पष्टीकरण करने के लिए जारी किया गया है। ताकि शक्तियों के कार्यसंचालन में किसी तरह का कोई भ्रम ना रहे।

उन्होंने कहा कि ‌दिल्ली की चुनी हुई सरकार के पास बहुत सारी शक्तियां हैं, इनमें से कुछ शक्तियां केंद्र सरकार के पास भी हैं।
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