दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक बार फिर सख्त रवैया दिखाया। बल्लभगढ़ बस डिपो से दिल्ली के मेडिकल रूट पर जाने वाली सभी बसों को बदरपुर बॉर्डर पर रोक दिया गया।
इस वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ यात्रियों ने ऑटो के धक्के खाए, तो कुछ ने दिल्ली की बसों का रुख किया। बताया गया है कि 18 बसों का चालान काटने के बाद भी उन्हें फरीदाबाद वापस भेज दिया गया। इसे लेकर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और रोडवेज कर्मचारियों में काफी बहस हुई।
उल्लेखनीय है कि यात्रियों की परेशानी को देखते हुए दो दिन से चालान कटवाकर रोडवेज मेडिकल और सराय काले खां तक बसों को चलवा रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार को यह आइडिया भी फेल हो गया।
बल्लभगढ़ बस डिपो के महाप्रबंधक महिपाल यादव ने बताया कि मामला आला अधिकारियों की जानकारी में डाल दिया गया है। मुख्यालय से जैसे निर्देश प्राप्त होंगे, वैसी कार्रवाई स्थानीय स्तर पर की जाएगी।
इससे पहले बुधवार को रोडवेज कर्मचारियों ने बल्लभगढ़ बस डिपो महाप्रबंधक महिपाल यादव के साथ बैठक की थी। कर्मचारियों ने शिकायत की कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस बिना किसी ठोस आधार के सिटी बसों का चालान कर रहे हैं। हरियाणा रोडवेज की बसों में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस कर्मी चढ़ जाते हैं। बस परिचालक जब पुलिसकर्मियों से टिकट लेने को कहते हैं तो वे दादागिरी दिखाते हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि शहर से दिल्ली के लिए कई निजी बस आपरेटर भी जाते हैं। जिन के पास कोई परमिट नहीं है। इस बारे में जानकारी होने के बाद भी उनका चालान नहीं किया जा रहा है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रेस सचिव राम आसरे ने बताया कि सोमवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी अपनी बसों को दिल्ली नहीं जाने देंगे। साथ ही दिल्ली की बसें यहां नहीं आने देंगे।
हरियाणा रोडवेज की बसों के चालान किए जा रहे हैं। जिसका भुगतान कर्मचारी अपनी जेब से कर रहे हैं। बुधवार को 18 सिटी बसें मेडिकल और सराय काले खां तक गईं। लेकिन सभी के 100-100 रुपये के चालान किए गए।