सजा पर बहस के लिए 30 मई को होगी सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने शुक्रवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को 2001 में उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की ओर से दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराया है।
सक्सेना ने 2001 में पाटकर के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उस समय वह अहमदाबाद स्थित एनजीओ नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के प्रमुख थे। सक्सेना ने पाटकर के खिलाफ 25 नवंबर 2000 को देशभक्त का असली चेहरा शीर्षक से एक प्रेस नोट जारी कर उन्हें बदनाम करने का मामला दर्ज कराया था। पाटकर ने कहा कि हवाला लेन-देन से दुखी वीके सक्सेना खुद मालेगांव आए, एनबीए की तारीफ की और 40 हजार रुपये का चेक दिया। लोक समिति ने भोलेपन से तुरंत रसीद और पत्र भेजा, जो किसी भी चीज से ज्यादा ईमानदारी और अच्छे रिकॉर्ड रखने को दर्शाता है। लेकिन चेक बाउंस हो गया। जांच करने पर बैंक ने बताया कि खाता मौजूद ही नहीं है। पाटकर ने कहा कि सक्सेना देशभक्त नहीं बल्कि कायर हैं।
2001 में शिकायत दर्ज होने के बाद अहमदाबाद की एक एमएम अदालत ने आईपीसी की धारा 500 के तहत अपराध पर संज्ञान लिया और सीआरपीसी की धारा 204 के तहत पाटकर के खिलाफ प्रक्रिया जारी की। 3 फरवरी, 2003 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी की एक सीएमएम अदालत को शिकायत मिली। 2011 में पाटकर ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का दावा किया। न्यायाधीश ने कहा कि पाटकर की हरकत जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण थीं, जिसका उद्देश्य सक्सेना की अच्छी छवि को धूमिल करना था और इससे उनकी प्रतिष्ठा और साख को काफी नुकसान पहुंचा है।